आगामी सिंहस्थ पर्व की तैयारियों और सड़कों के चौड़ीकरण के तहत धार्मिक स्थलों को हटाने की प्रशासनिक कवायद के बीच उज्जैन शहरकाजी खलीकुर्रहमान का बड़ा बयान सामने आया है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रशासन ने उन्हें चर्चा के लिए आमंत्रित किया है। इस संबंध में विचार करने के बाद वे अपना जवाब सौंपेंगे।
शहरकाजी ने प्रशासन को निष्पक्षता बरतने की सलाह देते हुए कहा कि केडी गेट चौड़ीकरण के समय मुस्लिम समाज ने आगे बढ़कर सहयोग किया था। अब प्रशासन को भी अपना नजरिया समान रखना होगा। उन्होंने कहा, “प्रशासन को अपने चश्मे का नंबर बराबर रखना चाहिए, वह अलग-अलग नहीं होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि वर्तमान हालात संवेदनशील हैं और प्रशासन की छोटी सी चूक से पूरे शहर की साख प्रभावित हो सकती है।
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शहरकाजी ने शाही मस्जिद के संबंध में लगाई गई पिटीशन को गैर-प्रामाणिक (अनऑथेंटिक) बताया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष इस मामले में न तो कभी अदालत गया है और न ही फिलहाल ऐसी कोई मंशा है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने यह पिटीशन लगाई थी, वे इसके लिए ऑथेंटिक नहीं थे।
प्रशासन द्वारा तैयार की गई धार्मिक स्थलों की सूची के संबंध में शहरकाजी ने कहा कि सूची मिलने के बावजूद उन्होंने अभी उसे खोलकर नहीं देखा है। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ पहली बार आयोजित नहीं हो रहा है और मुस्लिम समाज हमेशा प्रशासन का सहयोग करता रहा है। हालांकि, चौड़ीकरण के नाम पर किसी भी धार्मिक स्थल को हटाना उचित नहीं है।
खड़े हनुमान मंदिर से जुड़ी भ्रामक खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए शहरकाजी ने कहा कि किसी भी समाज को बेवजह निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। किसी फोटो या वीडियो की पूरी तस्दीक किए बिना उसे सोशल मीडिया पर साझा करने से शहर का माहौल खराब होता है। इससे सभी को बचना चाहिए।