पिछले एक माह से विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल को चढ़ाई जाने वाली लड्डू प्रसादी चर्चाओं में बनी हुई है। पिछले कुछ दिनों में इस प्रसादी के निर्माण से लेकर लड्डू की गुणवत्ता की 13 टेस्ट के माध्यम से जांच की गई, जिसमें लड्डू शुद्ध पाए गए। अब बात हो रही है हाई कोर्ट के उस फैसले की, जिसके बाद लड्डू प्रसादी के बॉक्स से श्री महाकालेश्वर मंदिर का शिखर और ओम जल्द ही हटाए जाएंगे।
19 अप्रैल को महंत सुखदेवानंद, ब्रह्मचारी गुरु श्री महंत योगानंद, ब्रह्मचारी श्री शंभू पंच अग्नि अखाड़ा इंदौर और पंडित शरद कुमार मिश्रा के साथ ही गुरु श्री स्वामी राधाकांताचार्य महाराज श्री दुर्गा शक्तिपीठ और अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के कार्यकर्ताओं द्वारा मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर में जनहित याचिका दायर की गई थी। इस याचिका में बताया गया था कि श्री महाकालेश्वर मंदिर के लड्डू भोग प्रसाद के पैकेट पर सनातनी चित्र और चिन्ह अंकित हैं, जिसमें श्री महाकालेश्वर शिखर, श्री नागचंद्रेश्वर महादेव, श्री ओंकारेश्वर महादेव और ॐ का चिन्ह शामिल है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि बाबा महाकाल के लड्डू प्रसादी के पैकेट को श्रद्धालु उपयोग के बाद डस्टबिन में फेंक देते हैं, जिससे सनातन धर्म का अपमान होता है।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि 90 दिनों के अंदर याचिकाकर्ता के निवेदन का निराकरण किया जाए। इसके बाद श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति ने निर्णय लिया कि भोग प्रसाद के पैकेट्स पर अब सनातनी चित्र और चिन्ह अंकित नहीं किए जाएंगे।
शिखर और ॐ जल्द हटाए जाएंगे
श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति के अध्यक्ष और जिला कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने कहा कि हाई कोर्ट के निर्देश के बाद लड्डू प्रसादी के पैकेट पर नया डिजाइन तैयार किया जाएगा। प्रसादी के बॉक्स पर बने महाकाल मंदिर के शिखर और ॐ को जल्द ही हटा दिया जाएगा। मंदिर की ओर से श्रद्धालुओं को प्रदान किए जाने वाले लड्डू प्रसाद के पैकेट्स के डिजाइन पर चर्चा हो रही है, और प्राप्त सुझावों के अनुसार इसे लागू किया जाएगा।
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की बैठक के अन्य निर्णय
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की बैठक श्री महाकाल महालोक के सभा कक्ष में आयोजित की गई। बैठक में मंदिर की वर्तमान चिंतामण स्थित गौशाला को बमौरा गांव स्थित मंदिर की भूमि में विस्थापित करने का निर्णय लिया गया, जिससे इसे आदर्श गौशाला के रूप में विकसित किया जा सके। बैठक में मंदिर द्वारा की जा रही भू-अर्जन संबंधी आपत्तियों का निराकरण, पट्टाभिराम मंदिर की भूमि का अर्जन, मंदिर के विस्तार के संदर्भ में विभिन्न विभागों का पुनर्गठन, और मेन पावर प्रबंधन को सुदृढ़ करने के निर्णय लिए गए।