विश्व प्रसिद्ध द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा महाकाल की पवित्र शाही सवारी में अब परंपरा और आधुनिक तकनीक का एक अनोखा संगम देखने को मिल सकता है। पशु अधिकार संगठन पेटा (PETA) ने मंदिर प्रबंधन समिति और जिला प्रशासन के सामने एक मैकेनिकल (रोबोटिक) हाथी तोहफे में देने का प्रस्ताव रखा है।
पेटा ने रोबोटिक हाथी रखने का प्रस्ताव रखा
बताया जाता है कि यह 10 फीट ऊंचा और 800 किलोग्राम वजनी रोबोटिक हाथी पूरी तरह असली हाथी जैसा दिखता है। छह लाख रुपये की लागत से बना यह रोबोट मेटल, रबर-फाइबर और पांच मोटरों से संचालित होता है। यह अपनी आंखें, कान, सूंड और पूंछ हिलाने के साथ-साथ पानी की बौछार भी कर सकता है। सबसे खास बात यह है कि यह धार्मिक सीट (अंबारी) उठाने में भी पूरी तरह सक्षम है।
हालिया हादसों के बाद सुरक्षा पर जोर
संगठन ने 26 जुलाई को इंदौर में हुई उस दुखद घटना का हवाला दिया है, जहां उज्जैन से लाए गए एक हाथी ने एक ऑटो चालक को कुचल दिया था। भीड़भाड़ वाली सवारियों में हाथियों के भड़कने से जनहानि और जानवरों, दोनों को खतरा रहता है। वर्तमान में 67 वर्षीय हथिनी 'सुमा' को मेडिकल जांच के बाद सवारी में शामिल किया गया है, लेकिन पेटा का मानना है कि रोबोटिक हाथी से बिना किसी जोखिम के परंपरा कायम रखी जा सकती है।
देशभर के 40 से अधिक मंदिरों में अपनाई गई तकनीक
केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र (पंढरपुर व इस्कॉन नवी मुंबई) और उत्तर प्रदेश के कानपुर सहित देश के 40 से अधिक मंदिरों में रोबोटिक हाथियों का सफल प्रयोग हो रहा है। पेटा अब तक ऐसे 29 हाथी दान कर चुका है। यहां तक कि तेलंगाना सरकार ने भी अपने आधिकारिक समारोहों के लिए रोबोटिक हाथी को चुना है।
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प्रशासन और पुजारियों का रुख
महाकाल मंदिर समिति के अध्यक्ष व उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि चूंकि इस साल की सवारियां शुरू हो चुकी हैं, इसलिए इस प्रस्ताव पर पुजारियों और संबंधित पक्षों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। दूसरी ओर, मंदिर के पुजारी और पुरोहित वर्ग इस बदलाव को लेकर फिलहाल सतर्क हैं। पुरोहित समिति के प्रमुख लोकेंद्र व्यास और पुजारी समिति के अध्यक्ष विजय शंकर शर्मा का कहना है कि हाथी हमारी धार्मिक और पौराणिक परंपराओं का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। इसलिए किसी भी अंतिम फैसले से पहले धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के आलोक में व्यापक चर्चा जरूरी है।