उज्जैन में रोड चौड़ीकरण के लिए हटाए गए प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा 55 दिन से टेंट में है। प्रशासन ने रात में स्कैनिंग की। भक्त प्रतिमा को मूल स्थान पर रखने की मांग कर रहे हैं।
कंठाल चौराहे से छत्री चौक रोड चौड़ीकरण के लिए हटाए गए प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। 55 दिन से 8 फीट ऊंची प्राचीन प्रतिमा टेंट के नीचे विराजमान है। इस बीच प्रशासन समाधान निकालने के बजाय रातों-रात कार्रवाई में जुटा है। सोमवार देर शाम प्रशासनिक टीम विशेष मशीनों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ मंदिर पहुंची और प्रतिमा की स्कैनिंग शुरू कर दी।
बताया जा रहा है कि एसडीएम एलएन गर्ग सहित अधिकारियों की टीम करीब डेढ़ घंटे तक मौके पर मौजूद रही। स्कैनिंग के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की गई कि प्रतिमा का आधार जमीन के अंदर कितनी गहराई तक है और नीचे की संरचना कैसी है। सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन की मंशा प्रतिमा को टंकी चौक के पास बने नए मंदिर में शिफ्ट करने की है।
व्यास ने आरोप लगाया कि प्रशासन रात के अंधेरे में बिना किसी सार्वजनिक सूचना के गुपचुप तरीके से जांच क्यों कर रहा है? अगर जांच करनी ही थी तो दिन में पारदर्शी तरीके से पुजारी और भक्तों की मौजूदगी में करनी चाहिए थी। रात में इस तरह की कार्रवाई से श्रद्धालुओं में भ्रम और आक्रोश पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि स्कैनिंग की रिपोर्ट और संबंधित कागजात अधिकारियों से ले लिए गए हैं, ताकि बाद में अधिकारी अपने बयान से मुकर न सकें।
भक्त बोले- रामलला भव्य मंदिर में, उनके दूत टेंट में
खड़े हनुमान मंदिर को लेकर भक्तों की आस्था आहत हो रही है। लोगों का कहना है कि प्रभु श्रीराम तो टेंट से निकलकर अयोध्या के भव्य मंदिर में पहुंच गए, लेकिन उनके दूत रामभक्त हनुमान को शासन-प्रशासन ने मंदिर से निकालकर टेंट में रख छोड़ा है। इस मामले को लेकर अब तक 45 हजार हस्ताक्षर, 50 समाज, 150 पंचायतों और व्यापारियों की ओर से 450 आवेदन दिए जा चुके हैं। सभी की एक ही मांग है कि खड़े हनुमान जहां विराजमान हैं, वहीं रहें।