सायबर सेल ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय ठग गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो लोगों को ठगते हैं। गिरोह के चार सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, जिसमें से दो विदेशी हैं। दिल्ली से इन चारों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि एक युवती को शादी का झांसा देकर उसे अपने जाल में फंसाया और कस्टम से सामान छुड़ाने के नाम पर करीब 67 लाख रुपये की ठगी की।
जानकारी के मुताबिक मामला 2016 का है। संत नगर निवासी युवती को फेसबुक पर लुईस डर्क नामक युवक ने फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी। युवती ने फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार की और दोनों के बीच बातचीत होने लगी। बाद में मोबाइल नंबर पर आदान-प्रदान हुआ और दोनों वाट्सएप पर भी संपर्क में रहे। इसी दौरान लुईस डर्क ने युवती के सामने शादी का प्रस्ताव रखा जिस पर युवती ने मंजूरी दे दी। कुछ समय बाद डर्क ने फोन कर बताया कि वह शादी के लिए अपने देश से ज्वेलरी, करंसी महंगे गिफ्ट लेकर लेकर आया लेकिन कस्टम ड्यूटी, मनी लांड्रिंग की वजह से एयरपोर्ट पर माल फंस गया। सामान निकालने के लिए रुपयों की जरूरत है। इस पर युवती ने उसके बताए बैंक खातों में रुपये डालने शुरू किए और 2016 से 2018 तक तीन वर्षों में करीब 67 लाख रुपये का चूना लगा दिया। इसके बाद पुलिस से शिकायत की। शिकायत की जांच के बाद राज्य सायबर सेल ने 2017 में केस दर्ज कर खोजबीन की। ठग गिरोह का पता चलने पर टीम भेजी। उत्तराखंड के रुद्रपुर से मोहित उसके जीजा सोहन सुखपाल, दिल्ली से एडीके नौउका निवासी नाइजीरिया व फौजी ओमार निवासी सोमालिया को गिरफ्तार किया। कोर्ट में पेश कर चारों को 7 अप्रैल तक रिमांड पर लिया है।
तीन साल में करोड़ों का ट्रांजेक्शन
पुलिस के अनुसार जो आरोपी गिरफ्तार हुए हैं उनका मुख्य काम ही ठगी है। उन्होंने किराये के मकान, फर्जी दस्तावेजों के आधार से बैंकों में गरीब अनपढ़ लोगो के खाते खुलवाए। ठगी के लिए अब तक 20 खातों के उपयोग का पता चला है। आरोपियों के खातों में 2016 से 2019 तक करीब 6 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ है। यह बात सामने आई है कि सोमालिया और नाइजीरिया के दोनों विदेशी नागरिकों का वीजा खत्म हो चुका है। इसके बाद भी दोनों अवैध रूप से भारत में रह रहे थे। दोनों इतने शातिर है की लगातार अपने ठिकाने बदलते रहते थे। इस दौरान कई लोगों को सोशल मीडिया पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजकर अपनी बातों के जाल में फंसाते थे। ठगी करने के बाद उसके रुपयों से गरीबों के खाते खुलवाकर उसमें ट्रांजेक्शन करते थे।