Ujjain News: उज्जैन की एक केमिकल फैक्टरी पर कर्मचारियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जहरीली गैस के कारण 30 से अधिक लोग 60-70% तक बहरे हो गए। शिकायतों के बावजूद उन्हें अब तक न्याय और रोजगार नहीं मिला है।
देवास रोड स्थित सोयाबीन प्लांट के पास एक केमिकल फैक्टरी पर गंभीर आरोप लगे हैं। यहां काम कर चुके कर्मचारियों का दावा है कि फैक्टरी में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण उनकी जिंदगी बर्बाद हो गई है।
पीड़ितों के अनुसार, शुरुआत में वे खुशी-खुशी काम करने आए थे, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि यह नौकरी उनकी सेहत पर भारी पड़ जाएगी। कर्मचारियों का कहना है कि फैक्टरी से निकलने वाली गैस के कारण करीब 30 से 35 लोग 60 से 70 प्रतिशत तक अपनी सुनने की क्षमता खो चुके हैं। अब स्थिति यह है कि वे बिना हियरिंग मशीन के कुछ भी सुन पाने में असमर्थ हैं। पीड़ित कर्मचारियों ने कंपनी प्रबंधन, प्रशासन, पुलिस और लेबर कोर्ट तक न्याय की गुहार लगाई, लेकिन अब तक उन्हें कोई राहत नहीं मिली है।
सुनने की क्षमता खत्म
फैक्टरी में काम कर चुके वासुदेव सोलंकी ने बताया कि दो साल पहले काम शुरू करने के बाद उनके कानों में सीटी बजने लगी और आंखों में जलन होने लगी। उन्होंने इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज किया और प्रबंधन को भी जानकारी दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में जब मेडिकल जांच कराई गई तो पता चला कि उनकी सुनने की क्षमता 60-70% तक खत्म हो चुकी है।
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गैस के संपर्क में रहने से उनकी हालत बिगड़ी: मजदूर
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कर्मचारियों ने कहा कि फैक्टरी में पर्याप्त सुरक्षा उपकरण नहीं दिए जाते। लगातार गैस के संपर्क में रहने से उनकी हालत बिगड़ती गई, जिसके चलते उन्हें मजबूरी में नौकरी छोड़नी पड़ी। पीड़ितों का यह भी कहना है कि अब उनकी स्थिति ऐसी हो गई है कि कोई उन्हें नौकरी देने को तैयार नहीं है। कम उम्र होने के बावजूद बीमारी के कारण उन्हें हर जगह ठुकराया जा रहा है।
क्या बोले जिम्मेदार?