भक्तों ने जमकर गुलाल उड़ाया।
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इस बार 17 मार्च को शाम 7 बजे होलिका दहन किया गया। महाकाल मंदिर में होली खेली गई और महाकालेश्वर को हर्बल गुलाल अर्पित किए गए। सबसे पहले यहीं होलिका दहन किया जाता है। महाकाल को हर्बल गुलाल अर्पित कर मंदिर में होली खेलने की शुरुआत हुई। रंगपंचमी पर टेसू के फूलों से बनाए गए प्राकृतिक रंगों से होली खेली जाएगी। कोरोना के कारण होली व रंगपंचमी पर श्रद्धालु महाकाल मंदिर नहीं जा पा रहे थे, लेकिन इस बार रोक हटने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु महाकाल के आंगन पहुंच रहे हैं और होली उत्सव में शामिल हो रहे हैं।