मध्यप्रदेश के उज्जैन की एक अदालत ने एक 21 वर्षीय युवक को दुष्कर्म के मामले में 20 साल की सजा सुनाई है। इस प्रकरण में पीड़िता आरोप लगाने के बाद अपने बयान से मुकर गई थी। तब जज ने उसका डीएनए टेस्ट करने के आदेश दिए। इससे ही दुष्कर्म की पुष्टि हुई और शाजापुर के रहने वाले 21 वर्षीय आरोपी राहुल को सजा सुनाई गई।
घटना जनवरी 2020 की है। पीड़िता की मां ने उसे पोते को स्कूल छोड़ने भेजा था। वह घर नहीं लौटी तो परिजनों ने अपहरण की रिपोर्ट लिखाई। अगले दिन पीड़िता ने राहुल के खिलाफ अपहरण और बलात्कार का प्रकरण दर्ज करवाया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। कोर्ट में केस चला तो पीड़िता बयान से मुकर गई। उसने सरकारी वकील की मदद नहीं की। इस पर वकील ने कोर्ट से अनुमति मांगी और डीएनए टेस्ट के आदेश जारी करवाए। इसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर कोर्ट ने सजा सुनाई। आरोपी की उम्र महज 21 साल होने का परिजनों ने हवाला दिया था। वकीलों ने भी सजा कम करने की दलील दी थी। सरकारी वकीलों ने इसका विरोध किया। इसके बाद पॉक्सो एक्ट की विसेष अदालत में जज डॉ. आरती शुक्ला पांडेय ने आरोपी को 20 साल की सजा सुनाई।