इस तरह सड़क पर फेंक दिए सम्राट विक्रमादित्य के फोटो लगे फ्लेक्स
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ये है उज्जैन। यहां दो दिन पहले जिस सम्मान के साथ नगर गौरव दिवस मनाया गया। विक्रमोत्सव मनाया गया और अब विक्रमादित्य की फोटो पैरो तले रौंदी जा रही है। सवाल उठ रहे हैं कि अब कहां गई वह आस्था वह सम्मान जिसके लिए खुद मप्र के मुखिया शिवराज सिंह चौहान उज्जैन पहुंचे थे।
दरअसल, गुड़ी पड़वा पर उज्जैन का गौरव दिवस मनाया गया। इसकी पूर्वसंध्या पर महाकाल मंदिर से गौरव यात्रा निकाली गई। इसमें सम्राट विक्रमादित्य का यशोगान किया गया। उनके नवरत्नों की झांकी सजाई गई। गौरव दिवस पर बड़ा आयोजन हुआ और धर्मनगरी अवंतिका दुल्हन की तरह सजी। मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बतौर अतिथि उज्जैन पहुंचे और शहर के पौराणिक महत्व की बातें की। देवास रोड पर बिड़ला शोध भवन में विक्रमोत्सव के लिए विक्रमादित्य शोध पीठ का अस्थायी ऑफिस खोला गया। इसके लिए परिसर की साज-सज्जा के साथ अनेक होर्डिग्स (फ्लैक्स) लगाए गए थे। यहां विक्रमोत्सव के तहत सम्राट विक्रमादित्य का यशोगान किया। एक इवेंट कंपनी को पूरा काम देने की बात सामने आई लेकिन जैसे ही आयोजन खत्म हुआ तो यशोगान बस बातों में सिमट गया। जिन सम्राट विक्रमादित्य की तस्वीरों का पूजन किया गया था उनके फोटो को पैरो तले रौंदने के लिए फेंक दिया। कहा गया कि इवेंट कंपनी आयोजन खत्म होने के बाद अपना सामान लेकर चली गई। जो फ्लैक्स और होर्डिंग लगाए गए थे वे वहीं छोड़ दिए। इनमें सम्राट विक्रमादित्य की फोटो के साथ विक्रमोत्सव की अन्य जानकारी भी है। ये सड़क पर पड़े हैं और लोगों के पैरो तले आ रहे हैं। इसके बाद से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर उज्जैन के गौरव का प्रेम अब कहां गया। जिन अफसरों ने सीएम को रिझाने के लिए इतने तामझाम किए वे अब पलटक क्यों नहीं झांक रहे।