मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनावों में 165 सीटें हासिल करने के बाद भारतीय जनता पार्टी आत्मविश्वास से भरी थी। उसे लग रहा था कि वह लोकसभा की पूरी 29 सीटें आसानी से जीत लेगी। लेकिन कुछ महीनों में ही हालात उतने आसान नहीं रह गए हैं।
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जब नरेंद्र मोदी नीमच में सोलर प्लांट का उद्घाटन करने के बाद ग्रीन रिवोल्यूशन के लिए शिवराज सिंह को बधाई दे रहे थे, उसी समय राज्य में ओलों और बारिश ने किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया।
लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी अहम मुद्दा हैं, लेकिन राज्य में भाजपा के सामने कम से कम सात बड़ी समस्याएं भी हैं, जो चुनाव नतीजों को प्रभावित कर सकती हैं।
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1- किसानों की खस्ता हालत
फरवरी के अंतिम सप्ताह और मार्च के पहले सप्ताह में बारिश व ओलों ने राज्य में 18 फीसदी कृषि विकास दर के दावों की हवा निकाल दी।
केवल तीन सप्ताह में आठ किसान आत्महत्या कर चुके हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 2000 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की है लेकिन राहत कहां से आएगी, कैसे किसानों तक पहुंचेगी और क्या चुनावों से पहले तक किसानों तक यह राहत पहुंच जाएगी, यह ऐसे सवाल हैं, जो राज्य सरकार की कड़ी परीक्षा लेने वाले हैं।
प्रदेश के किसान खरीफ की फसल में पहले ही नुकसान उठाकर बैठे हैं। किसानों को बिजली के बकाया बिल भेजे जा रहे हैं और सहकारी समितियां वसूली के नोटिस भेज रही हैं।
2- प्रशासनिक मशीनरी और भ्रष्टाचार
राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों के पास 200-300 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्तियां बरामद हो रही हैं। नगर निगम के चपरासी और लोकनिर्माण विभाग के टाइम कीपर के पास करोड़ों रुपये बरामद हो रहे हैं।
कई आईएएस अधिकारी भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हैं। एक निश्चित समय सीमा में लोगों से जुड़े सरकारी कामकाज कराने वाला लोकसेवा गारंटी अधिनियम अप्रभावी दिखाई देता है।
महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में भ्रष्टाचार के मामलों की जांचें चल रही हैं।
3- व्यापम घोटाला
मध्य प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनावों के बाद व्यावसायिक प्रवेश परीक्षा मंडल (व्यापम) में हुए भर्ती घोटाले ने राज्य सरकार की नींद उड़ा रखी है।
शिवराज सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री रहे लक्ष्मीकांत शर्मा को घोटाले में आरोपी बनाया गया है। सत्ताधारी दल के और भी लोगों के नाम दबे स्वर में लिए जाते हैं।
भाजपा की नेता उमा भारती उस समय बिफर गईं जब घोटाले की पूछताछ में उनका नाम लिया गया और उन्होंने सीबीआई जांच की मांग कर डाली। विपक्षी दल तो सीबीआई जांच की मांग कर ही रहा है।
दो और चुनौतियां
4-डीमैट या पीएमटी घोटाला: राज्य के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के दौरान हेराफेरी और पैसे लेकर मेरिट से अलग भर्तियां करने के मामले में कई लोग जेल जा चुके हैं। अरबिंदो कॉलेज के प्रमुख डॉ. विनोद भंडारी जेल में हैं। इन घोटालों से नौजवानों में खासा गुस्सा है।
5-औद्योगिक विकास व रोजगार इंदौर में आईटी कंपनियों इंफोसिस और टाटा का प्रवेश हुआ है लेकिन राज्य में अब माइक्रो, लघु और मझोले उद्योगों के विकास के मार्ग में बुनियादी ढांचे का विकास बाधा बना खड़ा है। राज्य की अर्थव्यवस्था अब भी कृषि और सेवा क्षेत्र पर निर्भर है। औद्योगिक ढांचे के विकास के बिना रोजगार के अवसर सीमित ही रहे हैं।
6- अवैध उत्खनन: मुरैना में एक आईपीएस अधिकारी की हत्या अवैध उत्खनन को रोकने के दौरान हुई थी। उसके बाद कई अधिकारियों पर हमले हो चुके हैं। माना जाता है कि इन अवैध उत्खनन की घटनाओं के पीछे प्रभावशाली नेताओं का समर्थन रहता है।
7- शिशु मृत्यु और मातृ मृत्यु दर: सालाना स्वास्थ्य सर्वे (एएचएस) -2012-13 में मातृ मृत्युदर के मामले में मध्य प्रदेश देश में चौथे स्थान से सातवें पर आ गया है। पहले प्रति लाख 277 माताओं की मृत्यु हो रही थी, अब यह कुछ कम होकर 227 तक आ गया है। यह आंकड़ा जननी सुरक्षा योजनाओं के बावजूद है।