अपराधी कितना भी चालाक हो लेकिन कानून एक ना एक दिन उसे पकड़ ही लेता है लेकिन टीकमगढ़ जिले के एक हत्याकांड में तो कानून के हाथ भी ढीले पड़ गए लेकिन समाज की पंचायत ने दबाव बनाकर मृतक की पत्नी से आखिर सच उगलवा ही लिया।
मामला पुलिस थाना चंदेरा के अंतर्गत बापू नगर का है, जहां पंचायत के सामने प्रेमी और प्रेमिका ने अपने अपराध को स्वीकार कर अपने बयान में स्पष्ट उल्लेख किया है कि मृतक की पत्नी से उसके नाजायज संबंध थे, जिसके चलते उसने प्रेमिका के पति की हत्या की थी। जानकारी के अनुसार रमेश अहिरवार 15 जनवरी को घर से लापता हो गया था, इसके बाद चंदेरा पुलिस ने 25 जनवरी को बीरपुरा गांव के पास एक गड्ढे से उसकी लाश को बरामद किया था। पुलिस ने मर्ग कायम कर फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया था और विवेचना के नाम पर खानापूर्ति की गई थी लेकिन समाज के लोग इसे हत्या मान रहे थे और लगातार पत्नी पर दबाव बना रहे थे।
इस संबंध में अहिरवार समाज के लोगों की पंचायत बुलाई गई। समाज द्वारा जब मृतक की पत्नी पर लगातार दबाव बनाया गया तब मृतक रमेश अहिरवार की पत्नी प्रभा और उसके प्रेमी प्रहलाद अहिरवार ने इस घटना को अंजाम देना स्वीकार कर लिया। आरोपी प्रहलाद ने पंचायत के सामने स्वीकार किया कि पहले मृतक की पत्नी के कहने पर उसने मृतक को शराब पिलाई और उसके बाद वीरपुरा गांव के पास ले जाकर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। घटना के समय पत्नी भी साथ में थी। बाद में लाश को वहीं पर फेंक कर वो दोनों अपने-अपने घर चले गए। बाद में 25 जनवरी को पुलिस ने रमेश की लाश बरामद की।
पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई का जब कोई परिणाम सामने नहीं आया तो बापू नगर में समाज के लोगों ने लगातार 3 दिन तक पंचायत कर मृतक की पत्नी पर दबाव बनाया और पूछताछ की तो उसने मामले का खुलासा किया। 15 अप्रैल को आरोप स्वीकार करने के बाद मृतक की पत्नी और उसकी प्रेमी को पंचायत ने शुद्धिकरण के लिए गंगा स्नान करने इलाहाबाद भेज दिया। 17 की सुबह पहुंचकर के दोनों आरोपियों ने गंगा में स्नान किया और इलाहाबाद के पंडा कृष्णजी छेदीलाल ने अपने प्रमाण पत्र में लिखा कि 17 अप्रैल की सुबह प्रभा देवी और उसका प्रेमी प्रहलाद पंचायत के फैसले पर गंगा स्नान करने आए हैं, जिन्होंने पंच फैसले में रमेश अहिरवार की हत्या करना स्वीकार किया है और रमेश की हत्या का शुद्धिकरण करने के लिए उन्होंने गंगा में स्नान किया है।
चंदेरा पुलिस थाने के प्रभारी अंकित दुबे का इस मामले में कहना है कि समाज के लोगों ने मृतक के भाई को शादी-विवाह और अन्य कार्यक्रम में बुलाना बंद कर दिया था। इसके बाद उसने पंचायत बुलाई और तब पंचों ने यह फैसला सुनाया। दुबे ने कहा कि पंचों का फैसला उनके संज्ञान में है और गुरुवार की शाम मृतक की पत्नी और उसके प्रेमी को लेकर पंच पुलिस थाने भी आए थे लेकिन मामला दर्ज करने के लिए कोई साक्ष्य और वैज्ञानिक प्रमाण नहीं होने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी चोट लगने का खुलासा नहीं होने के कारण मामला दर्ज नहीं किया जा सकता। टीकमगढ़ के पुलिस अधीक्षक रोहित ने कहा कि इस तरह का मामला उनके सामने नहीं आया है। यदि ऐसा कुछ है तो पुलिस के सीनियर अधिकारी से इस मामले की जांच कराएंगे।