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MP News: यहां कड़ाके की ठंड में अलाव के सहारे चल रही स्कूल की पढ़ाई, प्रदेश में शीतलहर का कहर जारी

Wed, 07 Jan 2026 07:28 PM IST
टीकमगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टीकमगढ़

सार

टीकमगढ़ जिले में कड़ाके की ठंड से स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। हालात ऐसे हैं कि बच्चों को ठंड से बचाने के लिए कक्षाओं के भीतर अलाव जलाकर पढ़ाई कराई जा रही है।
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कक्षा में जलता अलाव
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विस्तार
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टीकमगढ़ जिले में पड़ रही कड़ाके की ठंड ने आम जनजीवन के साथ-साथ स्कूली व्यवस्था को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। बीते एक सप्ताह से लगातार गिरते तापमान के कारण स्कूलों में पढ़ाई कराना शिक्षकों के लिए चुनौती बन गया है। हालात इतने गंभीर हैं कि बच्चों को ठंड से बचाने के लिए शिक्षकों को कक्षा के भीतर ही अलाव जलाना पड़ रहा है।
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ऐसा ही एक मामला टीकमगढ़ जिले की शासकीय प्राथमिक शाला शिलामती खेरा से सामने आया है, जहां जलते अलाव के बीच छात्र-छात्राएं पढ़ाई करते नजर आए।

मौसम विभाग के अनुसार बीती रात टीकमगढ़ जिले का न्यूनतम तापमान गिरकर 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि दिन का अधिकतम तापमान करीब 19 डिग्री दर्ज किया गया। शीतलहर और ठंडी हवाओं के चलते छोटे बच्चे स्कूल में ठंड से कांपते दिखाई दे रहे हैं। इसके बावजूद अब तक स्कूलों में अवकाश घोषित नहीं किया गया है, जिससे शिक्षकों और अभिभावकों में नाराजगी देखी जा रही है।

कक्षा में बैठना मुश्किल हो गया
बुधवार सुबह करीब 11 बजे का बताया जा रहा यह वीडियो शिलामती खेरा प्राथमिक शाला का है, जिसमें शिक्षक रामप्रकाश बच्चों को पढ़ाने के लिए कक्षा के अंदर अलाव जलाते नजर आ रहे हैं। शिक्षक रामप्रकाश ने बताया कि लगातार बढ़ती ठंड के बावजूद स्कूल खुले हुए हैं और छोटे बच्चों के लिए कक्षा में बैठना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि इस समस्या से कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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शिक्षक का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और उन्हें शिक्षा देना उनकी जिम्मेदारी है।

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ग्रामीणों और अभिभावकों ने की ये मांग
जब ठंड असहनीय हो जाती है, तो बच्चों को बचाने के लिए अलाव जलाना मजबूरी बन जाती है, हालांकि खुले अलाव से बच्चों की सुरक्षा को खतरा भी बना रहता है। स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों ने भी प्रशासन से मांग की है कि या तो स्कूलों का समय बदला जाए या कुछ दिनों के लिए अवकाश घोषित किया जाए। यह मामला शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस गंभीर स्थिति पर कब तक संज्ञान लेता है। 

 

कक्षा में जलता अलाव

 

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