टीकमगढ़ के दिगौड़ा थाने में शिकायत लेकर पहुंचे ग्रामीण ने पुलिस पर बदसलूकी करने का आरोप लगाया है। फरियादी ने कहा कि परिवार को घंटों थाने में बैठाकर रखा गया, गालियां दी गईं। हालांकि, थाना प्रभारी मनीष मिश्रा ने इन आरोपों को खारिज किया है।
टीकमगढ़ के दिगौड़ा थाने से सामने आया यह मामला सिर्फ एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि व्यवस्था पर उठते गंभीर सवालों की गूंज है। ग्राम बम्हौरी (बराना) के पच्चू अहिरवार जब अपने हक और न्याय की उम्मीद लेकर थाने पहुंचे थे, तब शायद उन्हें अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि वहां उन्हें सहारा नहीं, बल्कि अपमान का सामना करना पड़ेगा।
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हरे-भरे पेड़ों को बचाने की कोशिश में शुरू हुआ यह विवाद, पुलिस की कथित बदसलूकी के कारण एक दर्दनाक अनुभव में बदल गया। पच्चू अहिरवार का आरोप है कि उनकी शिकायत को सुनने के बजाय उन्हें और उनके परिवार को घंटों थाने में बैठाकर रखा गया, गालियां दी गईं और अभद्र व्यवहार किया गया। सबसे ज्यादा पीड़ा देने वाली बात यह है कि उनकी गर्भवती बेटी शिवानी, जो अपने पिता के साथ खड़ी थी, उसे भी धक्का-मुक्की और अपमान का सामना करना पड़ा। हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों का खंडन किया है।
हमारे पेड़ जबरदस्ती काटे जा रहे हैं- शिवानी
पीड़िता की बेटी शिवानी अहिरवार का आरोप है कि जब हम लोग थाने में रिपोर्ट करने पहुंचे तो पुलिसकर्मियों द्वारा बदतमीजी की गई और रिपोर्ट नहीं ली गई। हमारे पेड़ जबरदस्ती काटे जा रहे हैं। तीन दिन से हम लोग प्रतिदिन थाना जा रहे हैं लेकिन मामला दर्ज नहीं किया गया है।
थाना प्रभारी मनीष मिश्रा का बयान
दिगौड़ा पुलिस थाने के प्रभारी मनीष मिश्रा का कहना है कि दोनों गुटों पर प्रतिबंध में कार्रवाई की गई है। दोनों को आपस में झगड़ रहे थे। पुलिस द्वारा कोई भी बदतमीजी नहीं की गई है और आगे पुलिस कार्रवाई करेगी। हालांकि, इस मामले पर जिले के शीर्ष पुलिस अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन वहां से खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं आया।