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Guna News: खुद की जमीन पर खड़ी है सरकारी इमारत, लेकिन नेत्रहीन मालिक झोपड़ी में रहने को मजबूर; छलका दर्द

Wed, 06 May 2026 04:01 PM IST
गुना ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुना

सार

गुना में जनसुनवाई के दौरान नेत्रहीन युवक पप्पू प्रजापति ने बताया कि उसकी पट्टे की जमीन पर सरकारी निर्माण हो गया, लेकिन न मुआवजा मिला और न ही जमीन मिली। वो झोपड़ी में रहने को मजबूर है। पढे़ं पूरी खबर।

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नेत्रहीन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गुना कलेक्ट्रेट में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई उस समय भावुक हो उठी, जब राघौगढ़ तहसील के विजयपुर गांव से पहुंचे एक नेत्रहीन युवक ने अपनी आपबीती सुनाई। फरियादी पप्पू प्रजापति की दर्दभरी कहानी सुनकर मौजूद अधिकारी भी कुछ देर के लिए स्तब्ध रह गए। पप्पू ने बताया कि उसके परिवार के नाम करीब पौने तीन बीघा जमीन का वैध पट्टा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि उस जमीन पर आज शासकीय इमारतें खड़ी हैं, जबकि वह खुद झोपड़ी में रहने को मजबूर है।

पीड़ित के अनुसार, उसके पिता स्वर्गीय कैलाश नारायण कुम्हार को वर्ष 1984 में सर्वे नंबर 685/1 की जमीन का पट्टा मिला था। लेकिन पिता की मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण वे जमीन पर कभी कब्जा नहीं ले सके। समय के साथ उस भूमि पर शासकीय स्कूल, अस्पताल और नगरपालिका की पानी की टंकी का निर्माण हो गया।

चौंकाने वाली बात यह है कि शासन ने जमीन का उपयोग तो कर लिया, लेकिन परिवार को न तो मुआवजा दिया गया और न ही वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराई गई। पप्पू का आरोप है कि जमीन का जो हिस्सा खाली बचा था, उसे गांव के कुछ लोगों ने कथित रूप से अपने नाम दर्ज करा लिया। वर्तमान में वहां बाड़ा बनाकर पशुपालन किया जा रहा है।

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नेत्रहीन पप्पू ने भावुक स्वर में बताया कि उसे रोजमर्रा के कामों के लिए भी दूसरों का सहारा लेना पड़ता है। पिता के निधन के बाद वह अपनी मां के साथ झोपड़ी में रह रहा है और कई बार गुजारे के लिए लोगों से मदद मांगनी पड़ती है। पीड़ित ने कलेक्टर से मांग की है कि या तो उसे समान मूल्य की जमीन किसी अन्य स्थान पर दी जाए, या फिर उसकी भूमि पर हुए निर्माण का उचित मुआवजा दिया जाए।

जनसुनवाई में मौजूद अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को जांच के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह मामला सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है कि आखिर कैसे किसी व्यक्ति की जमीन पर सरकारी निर्माण हो जाता है और वर्षों तक उसे न्याय नहीं मिल पाता।

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