भाई की हत्या के मामले में बहन को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
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भाई की हत्या के मामले में बहन को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दरअसल रोज-रोज की मारपीट से तंग आकर बहन ने कैंची मारकर भाई को मौत के घाट उतार दिया था। मामले में रोचक बात ये है कि आरोपी ही फरियादी थी।
जानकारी के अनुसार मामला करीब डेढ़ साल पुराना है। आष्टा की कोर्ट ने सश्रम आजीवन कारावास और पांच हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला आष्टा की द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश कंचन सक्सेना ने सुनाया। उन्होंने आरोपी शाहना उर्फ शाहीन बी पुत्री मेहबूब शाह निवासी पुराना दशहरा मैदान आष्टा को भादवि की धारा 302 के अंतर्गत दोषी पाते हुए यह सजा सुनाई। मामले में रोचक बात ये है कि प्रकरण में फरियादी और आरोपी दोनों की शाहना उर्फ शाहीन रही।
अपर लोक अभियोजक विजेन्द्र सिंह ठाकुर ने बताया कि घटना दिनांक 18 अगस्त 2020 को फरियादी/अभियुक्त शाहना पिता महबूब शाह निवासी दशहरा मैदान आष्टा ने पुलिस थाना आष्टा में उपस्थित होकर इस आशय की रिपोर्ट लेख कराई कि 18 अगस्त 2020 की सुबह करीब 10 बजे वह अपने घर पर खाना बना रही थी, उसकी मां बानो बी एवं छोटी बहन याशमीन बी घर में काम कर रही थी। इसी दौरान उसका भाई राजा उर्फ अब्दुल रज्जाक की वहां आ गया।
राजा की बीबी मुस्कान बी 5 साल पहले उसको छोड़कर चली गई थी, जिसके लिए वह शाहना को जिम्मेदार मानकर उसके साथ आए दिन मारपीट करता था। इसी बात को लेकर 18 अगस्त को भी दोनों के मध्य बहस होने लगी। राजा उर्फ अब्दुल रज्जाक ने आरोपी शाहना को बेलन उठाकर मारा। इसी बात पर आरोपी शाहना ने मारपीट से तंग आकर पास में रखी सिलाई मशीन से कैंची उठाकर राजा के गले में मार दी। चोट लगने से वह फर्श पर गिर गया एवं खून बहने लगा। परिवार वाले आष्टा सिविल अस्पताल इलाज कराने ले गए, उक्त घटना की रिपोर्ट स्वयं अभियुक्त शाहना ने थाने पहुंचकर कराई थी। इस पर से प्रकरण धारा 307 भादवि में कायम कर विवेचना की गई।
उसी दिन राजा की मृत्यु हो गई। मर्ग इंटिमेशन लेख किया गया, जांच में आई साक्ष्य के बाद धारा 302 भादवि का इजाफा किया गया। विवेचना के उपरांत अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। अभियोजन की ओर से साक्ष्य कराए गए। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद द्वितीय अपर सत्र न्यायधीश कंचन सक्सेना द्वारा प्रकरण में आई साक्ष्य के आधार पर आरोपी शाहना उर्फ शाहीन बी को दोषी पाते हुए सश्रम आजीवन कारावास एवं 5 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया गया।