बीते शनिवार को आए 7.9 स्केल के भूकंप ने नेपाल में तो तबाही मचाई ही है, वहीं भारत के कई राज्यों में भूकंप से काफी नुकसान हुआ कई घर क्षतिग्रस्त हुए। बिहार में भी कई मौते हुई। भूकंप से हुए नुकसान का राज्य व केंद्र सरकार पीड़ितों को उचित मुआवजा देने की घोषणा कर चुकी है।
जिन लोगों ने अपने घरों, दुकानों और अन्य प्रॉपर्टी का बीमा करा रखा था वे अब भूकंप के नुकसान के मुआवजे के लिए बीमा का क्लैम कर रहे हैं। लेकिन मुआवजे के लिए अगर आपके पास भूकंप का प्रमाण पत्र नहीं है तो हो सकता है आपको क्लैम न मिले।
जी हां कुछ ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसमें पीड़ित के क्लैम के लिए बैंक ने उससे भूकंप आने का सर्टिफिकेट मांगा। अब हाल ये है कि पीड़ित भूकंप के सर्टिफिकेट के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है।
नहीं बनता ऐसा कोई सर्टिफिकेट
मामला मध्यप्रदेश के जबलपुर का है। बीते 25 अप्रैल को आए विनाशकारी भूकंप में जबलपुर निवासी अनीस कुरियन के मकान को क्षति पहुंची है। अनीस ने एसबीआई से अपने मकान का आठ लाख का बीमा करा रखा था। मकान की मरम्मत के लिए जब अनीस क्लैम के लिए बैंक गया तो बैंक वालों ने बीमा क्लैम के लिए भूकंप आने का प्रमाण पत्र मांगा।
अब पीड़ित अनीस जब भूकंप का सर्टिफिकेट लेने जिला क्लेक्ट्रेट पहुंचे तो यहां अधिकारियों ने ऐसे किसी भी सर्टिफिकेट के बनाए जाने से इंकार कर दिया। भूकंप के क्लैम के लिए सर्टिफिकेट मांगे जाने से खुद कलेक्टर भी हैरान हुए।
क्लेक्टर शिवनारायण के मुताबिक भूकंप आने का किसी भी प्रकार का सर्टिफिकेट नहीं बनाया जाता है, नियमों के आधार पर मकान की फोटो और जरूरी दस्तावेज ही क्लैम के लिए जरूरी माने जाते हैं।
नियमों के मुताबिक किसी भी प्रकार की आपदा जैसे बाढ़, भूकंप, भूस्खलन से मकान या दुकान को हुए नुकसान पर बीमा क्लैम के लिए फोटो, समाचार पत्रों का प्रिंट और मकान, दुकान की फोटो और इससे जुड़े दस्तावेज चाहिए होते हैं। वहीं भूकंप जैसी किसी दैविय आपदा आने के प्रमाण के लिए किसी भी तरह के सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं होती।