सागर पुलिस ने पीड़ित पर ही केस दर्ज कर लिया।
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सागर जिले की थाना गौरझामर पुलिस का एक कारनामा सामने आया है। सागर पुलिस ने पीड़ित पर ही केस दर्ज कर लिया। तनाव में आकर पीड़ित ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। अब मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने पुलिस अधीक्षक, सागर से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।
गौरतलब है कि जिस युवक के साथ अवैध शराब बेचने वालों ने मारपीट की थी, पुलिस ने उसी के खिलाफ एफआईआर लिख ली थी। एक महीने से आरोपी उसे बेहद परेशान करते रहे। जिससे बीते सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना से पुलिस के खिलाफ ग्रामीणों में आक्रोश था। परिजनों ने मंगलवार को सागर-नरसिंहपुर हाईवे पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया। लोगों ने मारपीट करने वाले व लापरवाह पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। इसके बाद मारपीट करने वालों के खिलाफ केस दर्ज हुआ।
परिवार वालों ने चक्काजाम किया, तब हुई कार्रवाई
एडिशनल एसपी सागर ने बताया कि एकतरफा एफआईआर के मामले में एसडीओपी देवरी को जांच सौंपी गई। पुलिस के अनुसार गौरझामर निवासी 29 वर्षीय पवन पिता अनिल जैन सोमवार की रात खाना खाकर सोने के लिए गया था। इसी दौरान उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मंगलवार सुबह शव फंदे पर लटका मिला। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। परिजनों ने सागर-नरसिंहपुर हाईवे पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया।
परिजनों का आरोप है कि पवन से मारपीट की गई थी, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। आरोपियों के साथ इस मामले में लापरवाह पुलिसकर्मिंयों पर भी कार्रवाई हो। प्रदर्शन के बाद पुलिस ने मृतक के मामा शैलेन्द्र जैन की शिकायत पर मारपीट करने वाले सौरभ पटेल, सचिन शर्मा, आकाश पटेल, सब्बू लोधी, अर्जुन लोधी के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। इसके बाद चक्काजाम समाप्त हुआ। मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के माननीय अध्यक्ष न्यायमूर्ति नरेन्द्र कुमार जैन ने पुलिस अधीक्षक, सागर से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।