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ग्वालियर में तानसेन समारोह: सुर सम्राट की जन्मस्थली बेहट में सजी समारोह की आठवीं सभा, सुरों के आगे सुध-बुध खो बैठे रसिक

Thu, 30 Dec 2021 04:19 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर

सार

तानसेन समारोह के तहत आठवीं सभा बेहट में मंगलवार को भगवान भोले के मंदिर के नीचे और झिलमिल नदी किनारे सजी। यह वही जगह थी जहां सुर सम्राट का बचपन संगीत साधना और बकरियां चराते हुए बीता था। 
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Gwalior: तानसेन समारोह में उज्जैन से आए अभिषेक व्यास ने सुमधुर गिटार वादन किया। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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तानसेन समारोह के तहत आठवीं सभा बेहट में मंगलवार को भगवान भोले के मंदिर के नीचे और झिलमिल नदी किनारे सजी। यह वही जगह थी जहां सुर सम्राट का बचपन संगीत साधना और बकरियां चराते हुए बीता था। सुर सम्राट तानसेन की जन्मस्थली बेहट में सजी आठवीं संगीत सभा में बहे सुर मखमली अहसास करा गए। संगीत कलाकारों ने ऐसा गाया-बजाया कि रसिक सुध-बुध खो बैठे।
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सभा की शुरुआत पारंपरिक ढंग से स्थानीय तानसेन कला केन्द्र बेहट के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत ध्रुपद गायन के साथ हुई। राग ‘भैरव’ में आलाप मध्यलय आलाप और द्रुत लय आलाप से शुरू करके सूलताल में बंदिश पेश की। जिसके बोल थे- ‘शिव आदि मद अंत योगी’। विद्यार्थियों ने पूरे कौशल से इसे पेश किया। इस प्रस्तुति में संजय पंत आगले ने पखावज पर बढ़िया संगत की।

गिटार के माधुर्य में डूबे रसिक
सभा के पहले कलाकार के रूप में उज्जैन से आए अभिषेक व्यास ने सुमधुर गिटार वादन किया। अभिषेक ने तानसेन रचित राग ‘मियां की तोड़ी’ से अपने वादन की शुरुआत की। उनके गिटार वादन से झर रहे सुरों के माधुर्य में रसिक डूब गए। आम तौर पर क्लासिकल म्यूजिक में हवाईन गिटार बजाने का चलन है, लेकिन अभिषेक स्पेनिश गिटार बजाते हैं। उनके गुरु ने 19 तारों से इसे हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के काबिल बनाया है ताकि, गमक मींड क्रंदन जैसे अंग इस पर बजाए जा सकें। आज के वादन में उन्होंने आलाप जोड़ झाला से शुरू कर राग मियां की तोड़ी में दो गतें पेश कीं। विलंबित और द्रुत, दोनों ही गतें तीन ताल में थीं। तबले पर निशांत शर्मा ने संगत की।
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आठवीं संगीत सभा में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भारत सिंह कुशवाह, संभाग आयुक्त आशीष सक्सेना, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आशीष तिवारी व एडीएम एच बी शर्मा सहित अन्य अधिकारियों ने प्रस्तुति देने आए कलाकारों का स्वागत किया। इस अवसर पर उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक जयंत भिसे भी मौजूद थे। संगीत सभा का आनंद लेने बेहट सहित अन्य समीपवर्ती ग्राम पंचायतों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में रसिक पहुंचे थे। ग्वालियर से भी इस सभा का आनंद लेने बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी यहां आए हैं। लोक धारणा है कि तानसेन की तान से ही निर्जन में बना भगवान शिव का मंदिर तिरछा हो गया था। यह भी किंवदंति है कि 10 वर्षीय बेजुबान बालक तन्ना उर्फ तनसुख भगवान भोले का वरदान पाकर संगीत सम्राट तानसेन बन गया।

कुंजन में रच्यो रास...
ध्रुपद के अमूर्त से बोलों का आभास कराते हुए बुलंद और सधे हुए स्वर में सुदीप भदौरिया ने राग भीम पलाशी और चौताल में निबद्ध बंदिश ‘कुंजन में रच्यो रास...’ का गायन किया। उन्होंने सभा में मौजूद संगीत पारखियों को गहरे से प्रभावित किया। सुदीप ग्वालियर ध्रुपद केंद्र में अभिजीत सुखदाने से ध्रुपद गायकी की तालीम ले रहे हैं। आलाप, मध्य लय आलाप और द्रुत लय आलाप से गायन में रंग भरने के बाद उन्होंने चौताल में निबद्ध यह बंदिश बड़े ही सहजता से पेश की। ध्रुपद के सुदीप ने अपने गायन में विविध लयकारियों से खूब रंग भरा। साथ ही गमक अंग का भी खूबसूरती के साथ उपयोग किया। उनके साथ पखावज पर संजय पंत आगले ने मीठी संगत की। 
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