बच्चों को देश का भविष्य कहा जाता है, क्योंकि किसी भी देश के भविष्य की बागडोर बच्चों के ही हाथों में होती है। ऐसे में शासन हो या प्रशासन, उनकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए इस भविष्य को संवारना, बच्चों को बेहतर शिक्षा देना। लेकिन, मध्यप्रदेश में देश के भविष्यों के साथ शिक्षा के नाम पर मजाक किया जा रहा है। जर्जर भवन, दरारों से भरी दीवारें, दीवारों का साथ छोड़ती सीमेंट, कमरों में टूटा-फूटा फर्नीचर, देखने में भवन भले ही कोई खंडहर लगे, लेकिन यह शिक्षा के मंदिर का नजारा है।
सिंगरौली जिले के कई ऐसे शिक्षा के मंदिर हैं, जहां की इमारतें किसी खंडहर से कम नहीं लगतीं। इतना ही नहीं, इस खंडहर हो चुके शिक्षा के मंदिर में बच्चे देश के भविष्य को गढ़ने की कहानी भी लिख रहे हैं। लेकिन, बच्चों को यह शिक्षा जान जोखिम में डालकर मिल रही है।
अमर उजाला की टीम ने जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के कई खंडहर हो चुके स्कूलों का जायजा लिया। शहरी क्षेत्र में स्थित भरूहां गांव के सरकारी स्कूल की इमारत और स्कूल की हालत देख आप दंग रह जाएंगे। ऐसे भवन में बच्चों की पढ़ाई कैसे होती होगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।