सीधी जिले में आदिवासी व्यक्ति पर पेशाब करने वाले बीजेपी नेता के खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई किए जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। आरोपी की पत्नी द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि प्रकरण को राजनीतिक मुददा बनाए जाने पर उसके पति के खिलाफ एनएसए की कार्रवाई की गई है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने एनएसए की कार्रवाई के संबंध में सरकारी अधिवक्ता को दिशा-निर्देश प्राप्त करने के आदेश जारी किए हैं।
याचिकाकर्ता कंचन शुक्ला की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि उनका पति प्रवेश शुक्ला एक पार्टी का नेता है। पति द्वारा एक आदिवासी युवक पर पेशाब करने का वीडियो वायरल होने के बाद इसे राजनीतिक मुददा बना लिया गया। प्रशासन द्वारा भी उसके खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई की गई है। याचिका में एनएसए कार्रवाई की वैधता को चुनौती दी गई थी।
याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि उसका कोई अपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। मामले को राजनीतिक मुददा का रूप दिया गया था, जिसके कारण प्रशासन ने आरोपी के खिलाफ एनएसए की कार्रवाई की है। एनएसए की कार्रवाई अनुच्छेद-21 का उल्लंघन है। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने कार्रवाई के संबंध में सरकारी अधिवक्ता को दिशा-निर्देश प्राप्त कर हाईकोर्ट को अवगत करवाने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अनिरूध्द मिश्रा ने पैरवी की।