मध्यप्रदेश के सीधी जिले से मानव संवेदना को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक जिंदा महिला को सरकारी रिकॉर्ड में “मृत” घोषित कर दिया गया है। कुसमी जनपद क्षेत्र के गोतरा गांव की आदिवासी महिला रुकमन के साथ ये घटना हुई है।
मध्यप्रदेश के सीधी जिले से मानव संवेदना को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक जिंदा महिला को सरकारी रिकॉर्ड में “मृत” घोषित कर दिया गया है। कुसमी जनपद क्षेत्र के गोतरा गांव की आदिवासी महिला रुकमन अब पूरे एक साल से खुद के “जिंदा” होने का सबूत लेकर भटक रही है। सिस्टम की गलती ने उसकी पूरी जिंदगी खराब कर दी है। उसे न राशन मिल रहा है, न कोई सरकारी योजना का लाभ। सरकारी दस्तावेज़ों में वह अब “स्वर्गवासी” बताई जा रही है।
रुकमन का कहना है कि वो जिंदा है लेकिन पंचायत वाले कहते हैं कि तुम तो मर चुकी हो। रुकमन सरकारी सिस्टम की लापरवाही और असंवेदनशीलता की जीती-जागती मिसाल बन चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, पंचायत कर्मियों ने लापरवाही में समग्र पोर्टल पर रुकमन के नाम से “मृत्यु प्रविष्टि” दर्ज कर दी। इसके बाद उसका नाम सभी सरकारी योजनाओं और राशन सूची से हट गया। परिवार के लोग भी हैरान हैं कि कोई जिंदा व्यक्ति सरकारी रिकॉर्ड में “मरा हुआ” कैसे दर्ज हो सकता है।
थक-हारकर रुकमन ने हाल ही में सीधी कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर जनसुनवाई में अपनी फरियाद रखी। उसने कहा कि एक गलती के कारण उसका जीवन बर्बाद हो गया है। अब वह सिर्फ “जिंदा होने” का सबूत देने में लगी है। इस पर कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी ने तत्काल मामले की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वाले पंचायत कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई होगी, साथ ही रुकमन का नाम समग्र आईडी पोर्टल पर पुनः सक्रिय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।