परिजनों को समझाते महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी।
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सीधी जिले के कुसमी में एक 14 साल की नाबालिग की शादी कराई जा रही थी, महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर बाल विवाह रुकवाया। वहीं विभाग ने परिजनों को बाल विवाह न करने और इसके अपराध होने की जानकारी दी।
दरअसल कुसमी तहसील के ग्राम देवार्थनौढिया में नाबालिग किशोरी के विवाह की तैयारियां चल रही थीं। 4 मई को घर में बरात आने वाली थी। इसी दौरान गांव में ही चर्चा होने लगी कि लड़की नाबालिग है और उसकी विवाह की उम्र नहीं हुई है। यह बात प्रशासन तक पहुंच गई। सूचना मिलते ही महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी पुलिस अमले के साथ 3 मई को लड़की के घर पहुंचे और जांच पड़ताल शुरू की।
शैक्षणिक दस्तावेजों से नाबलिग होने की पुष्टि हुई
महिला एवं बाल विकास के अधिकारियों ने बालिका की उम्र की पुष्टि के लिए शैक्षणिक दस्तावेजों, आधार कार्ड की जांच की, जिसके आधार पर बालिका की उम्र 14 वर्ष निकली। बालिका माध्यमिक शाला देवार्थनौढिया के कक्षा सातवीं में अध्ययनरत है। बच्ची के नाबालिग होने के चलते अधिकारियों ने परिजनों को उसका विवाह न कराने के लिए समझाया और बाल विवाह को रोका गया।
महिला बाल विकास परियोजना अधिकारी अनुसुइया वाजपेई ने बताया कि सूचना मिली थी कि ग्राम देवार्थनौढिया में नाबालिग लड़की की शादी हो रही है। जिस पर शादी रुकवाने टीम पहुंची। जांच में पाया गया कि लड़की की उम्र 18 वर्ष से कम है और वह 14 वर्ष की है। परिजनों को समझाकर बाल विवाह रुकवाया गया है।