श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर्व इस साल 18 अगस्त गुरुवार स्मार्त एवं 19 अगस्त शुक्रवार के दिन वैष्णव सम्प्रदाय से जुड़े भक्तों द्वारा मनाया जाएगा। जन्माष्टमी जिसके आगमन से पहले ही उसकी तैयारियां जोर-शोर से आरंभ हो जाती हैं और पूरे भारत वर्ष में जन्माष्टमी पर्व पूर्ण आस्था एवं श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
ज्योतिषाचार्य गणेश शर्मा के मुताबिक, पिछले साल की तरह इस साल भी दो दिन अष्टमी व्याप्त होने से जन्माष्टमी व्रत एंव उत्सव के संबंध में संशय बना हुआ है। इसी कारण पुराणों और धर्मग्रंथों में कृष्ण जन्माष्टमी व्रत व उत्सव का निर्णय स्मार्त मत (गृहस्थ और सन्यासी) व वैष्णव मत (मथुरा वृन्दावन) सम्प्रदाय के लिए अलग- अलग सिद्धांतों से किया है।
गृहस्थ और उतरी भारत के लोग कृष्ण जन्माष्टमी व्रत पूजा अर्धरात्रि व्यापिनी अष्टमी रोहिणी नक्षत्र वृषभ लग्न मे करते हैं, जबकि वैष्णव मत वाले लोग विशेष कर मथुरा वृन्दावन अन्य प्रदेशों में उदयकालिन अष्टमी (नवमी युता) के दिन ही कृष्ण उत्सव मनाते आ रहे हैं। अर्द्धरात्रि को अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र हो या न हो इस बात को महत्व नहीं देते हैं। जन्म स्थली मथुरा को आधार मानकर मनाई जाने वाले श्रीकृष्ण उत्सव के दिन ही सरकार छुट्टी की घोषणा करती है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत तथा जन्मोत्सव दो अलग-अलग स्थितियां हैं।
जन्माष्टमी निर्धारण के नियम
हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार, वैष्णव वे लोग हैं जिन्होंने वैष्णव संप्रदाय में बतलाए गए नियमों के अनुसार विधिवत दीक्षा ली है। ये लोग अधिकतर अपने गले में कण्ठी माला पहनते हैं और मस्तक पर विष्णुचरण का चिन्ह (टीका) लगाते हैं। इन वैष्णव लोगों के अलावा सभी लोगों को धर्मशास्त्र में स्मार्त कहा गया है। दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि वे सभी लोग, जिन्होंने विधिपूर्वक वैष्णव संप्रदाय से दीक्षा नहीं ली है, स्मार्त कहलाते हैं।
कृष्ण जन्माष्टमीऽयं निशीथव्यापिनी ग्राह्या। पूर्वदिन एव निशीथयोगे पूर्वा।।
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी रोहिणी नक्षत्र में मनाया जाना सर्वोत्तम माना गया है, परन्तु पंचांग के अनुसार इस साल 19 अगस्त की मध्यरात्रि के बाद रात्रि एक बजकर 55 मिनट से रोहिणी नक्षत्र आरम्भ होगा। अतः रोहिणी नक्षत्र 18 और 19 दोनों ही दिन मध्यरात्री रात्रि के समय नहीं रहेगा।
जन्माष्टमी की तिथि: 18 एवं 19 अगस्त
अष्टमी तिथि आरंभ रात 09 बजकर 20 मिनट से (18 अगस्त)
अष्टमी तिथि समाप्त रात 10 बजकर 59 मिनट तक (19 अगस्त)
निशिथ (रात्रि) पूजा का समय (18 अगस्त) रात 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 42 मिनट तक
पारण समय अगस्त 19 को 10:58 बजे के बाद
शास्त्र के अनुसार वैकल्पिक पारण समय
पारण समय 19 अगस्त को प्रातः 05:45 बजे के बाद भी किया जा सकता है।
इस साल वैष्णव कृष्ण जन्माष्टमी 19 अगस्त को मनाई जाएगी। 19 तारीख को व्रत रखने वालों के लिए निशिता पूजा का समय रात 11:59 से 12:43 तक रहेगा और पारण का समय 20 अगस्त को प्रातः 05:45 बजे के बाद होगा।