मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भाजपा संसदीय बोर्ड में फिलहाल भले ही जगह नहीं मिल पाई हो, लेकिन उनके समर्थकों ने उम्मीद नहीं छोड़ी है।
समर्थकों को उम्मीद है कि नवंबर में विधानसभा चुनाव में जीत के बाद शिवराज को संसदीय बोर्ड में शामिल किया जा सकता है। समर्थक उन्हें पीएम पद का दावेदार भी मान रहे हैं।
राजनाथ की टीम में शिवराज को जगह न मिलने से उनके समर्थकों को हैरानी हुई है। कार्यकर्ताओं के लिए चौंकाने वाली बात यह भी रही कि शिवराज सिंह के विरोधी माने जाने वाले दो नेताओं उमा भारती और प्रभात झा को उपाध्यक्ष बनाया गया है।
चुनाव का जहां तक तर्क है तो कर्नाटक के सदानंद गौड़ा और अनंत कुमार को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है, जबकि पार्टी को वहां भी चुनाव लड़ना है।
शिवराज खेमे के नेताओं का मानना है कि पार्टी के लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के बाद वह ज्यादा मजबूती के साथ आएंगे और नरेंद्र मोदी के साथ ही उनका दावा भी प्रधानमंत्री पद के लिए मजबूत होगा।
यदि मोदी के नाम पर एनडीए के घटक दलों में सहमति नहीं बन पाती है तब शिवराज की दावेदारी भी सामने आ सकती है। पार्टी के वरिष्ठ नेता आडवाणी भी उनकी तारीफ कर चुके हैं।