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60 हजार लोगों से मिल चुकी हैं सीएम की पत्नी

Wed, 20 Nov 2013 12:37 PM IST
जयप्रकाश पाराशर,विदिशा (म.प्र)
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सम्राट अशोक की बौद्ध पत्नी विदिशा देवी और मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह की तुलना में कोई तुक नहीं है, लेकिन आजकल विदिशा में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की पत्नी अपने पति को सत्ता में वापसी करने के लिए जीतोड़ मेहनत कर रही हैं।
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वह अपने पति के चुनाव की कमान संभाले हुए हैं। प्रचार की उनकी शैली यह है कि एक-एक घर जाकर मिल रही हैं। करीब डेढ़ लाख मतदाताओं की इस विधानसभा सीट के कम से कम 60 हजार लोगों से वह अब तक रूबरु हो चुकी हैं।

शिवराज सिंह अपना नामांकन दाखिल करने के बाद से अपना प्रचार करने विदिशा नहीं लौटे। और लोगों का कहना है कि वह आएंगे भी नहीं।
 
साधना सिंह का काफिला बहुत तामझाम वाला नहीं है। सुबह नौ बजे से वह घर से निकलती हैं। उनकी टीम में चार पांच महिलाएं और कुछ नौजवान होते हैं।

एक हाथ वाला माइक होता है। दो जीपें और कुछ मोटरसाइकिलें। भोजन के डिब्बे साथ होते हैं। जहां भी दोपहर होती है, किसी भी खेत पर टिफिन खोलकर लोग भोजन कर लेते हैं। साधना सिंह अपनी उपस्थिति में पूरे स्टाफ और सहयोगियों को भोजन कराती हैं। जाहिर है राजनीति करने की आत्मीयता की यह शैली उन्होंने अपने पति शिवराज सिंह चौहान से ही सीखी है।
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भाभीजी की यह टीम जब गांवों में पहुंचती है तो वहां पहले से ही तैयार कार्यकर्ताओं का लवाजमा उनके साथ हो जाता है। गांव में जहां भी लोग किसी कमी की शिकायत करते हैं, उसे नोट कराया जाता है। वह एक दिन में करीब 8-9 गांवों में भ्रमण कर लेती हैं और आश्चर्यजनक रूप से रोजाना 20 किमी की यात्रा कर लेती हैं।

पर्दे के पीछे साधना सिंह की राजनीतिक सक्रियता को भाजपा में हर कोई स्वीकार करता है। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने जब साधना सिंह पर आरोप लगाए तो शिवराज सिंह ने उन पर मुकदमा ठोक दिया था।

साधना सिंह विदिशा के विकास के बारे में कोई बड़े-बड़े वादे नहीं कर रहीं। वह कहती हैं, ‘आप बुदनी को देख लो, वहां का विकास देख लो, हमने वहां क्या किया है।‘ साधना सिंह के साथ चल रहे माइक पर कार्यकर्ता सरकार की उपलब्धियां गिनाते हैं। लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी शशांक भार्गव का सवाल है, “इतने साल से मुख्यमंत्री कौन था? इस दौरान विदिशा का विकास क्यों नहीं किया? क्या वे केवल बुदनी के मुख्यमंत्री थे?”

कांग्रेस में पचौरी गुट के शशांक भार्गव को इस बार विदिशा सीट जीतने की बड़ी उम्मीद थी। यहां कांग्रेस 1972 के बाद से कभी चुनाव नहीं जीते। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मैदान में उतरकर उनके सारे समीकरण बिगाड़ दिए हैं। भाजपा कार्यकर्ता अवधेश दुबे दावा करते हैं, ‘शिवराज सिंह चौहान इस बार ऐतिहासिक अंतर से जीतेंगे।’ अलबत्ता कांग्रेस के नेताओं की राय में जीत का अंतर ज्यादा नहीं रहेगा। कांग्रेस नेता बृजेश शर्मा का दावा है, ‘मुख्यमंत्री का आभामंडल के सामने शशांक भार्गव कड़ी टक्कर दे रहे हैं।’

मुख्यमंत्री के करीबी मुकेश टंडन और अन्य लोगों की टीमें दूसरे इलाकों में काम कर रही हैं, लेकिन चुनाव में शायद पूर्ववित्तमंत्री राघवजी से जानबूझकर दूरी रखी जा रही है। वह खुद भी कहीं मैदान में दिखाई नहीं दे रहे। यह बात जरूर है कि जो भाजपा टुकड़ों में बंट गई थी, अब एकजुट दिखाई दे रही है।
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