मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नए मंत्रिमंडल के गठन में कोई प्रयोग करने के बजाय उन्हीं पुराने चेहरों को मौका दिया है।
अर्चना चिटनीस, जगदीश देवड़ा और महेंद्र हार्डिया ही ऐसे भारी नाम कहे जा सकते हैं, जिन्हें ड्राप किया गया है।
सिंधिया राजघराने की दो महिलाएं यशोधरा राजे और मायासिंह मंत्रिमंडल में स्थान पा गई हैं। मुख्यमंत्री के मंत्रिमंडल को देखें तो वे परिवर्तन का कोई संदेश देने में सफल नहीं हो पाए हैं।
मंत्रिमंडल देखकर कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री कई नामों को चाहकर भी नहीं काट पाए हैं। वरिष्ठ नेता कैलाश चावला का नाम मंत्रिमंडल में नहीं है। उन्हें विधानसभा अध्यक्ष बनाया जा सकता है।
शपथ लेते ही शिवराज ने की घोषणाओं की बौछार
दसवीं बार विधानसभा चुनाव जीतने वाले पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर मंत्रिमंडल में शामिल हो गए हैं। उन्हें विधानसभा अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चाएं भी थीं।
बताया जाता है कि गौर मंत्री ही बनना चाहते थे। पुराने अन्य मंत्रियों में कैलाश विजयवर्गीय, गोपाल भार्गव, उमाशंकर गुप्ता, राजेंद्र शुक्ल, गौरीशंकर बिसेन, जयंत मलैया और नरोत्तम मिश्रा मंत्रीपद हासिल करने में सफल रहे।
शिवराज सिंह ने जिस तरह से पुराने चेहरों को बरकरार रखा है, लोकसभा चुनाव के पहले कोई जोखिम लेने से बचे हैं और भाजपा व आरएसएस का दबाव साफ नजर आता है।
अर्चना चिटनीस के बारे में कहा जा रहा है कि उन्हें खरगौन लोकसभा सीट से मैदान में उतारा जा सकता है। भाजपा ने मालवा-निमाड़ में जबर्दस्त सफलता हासिल की है।
शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में कुल 23 मंत्रियों को शामिल किया गया है।
19 कैबिनेट मंत्री, बाबूलाल गौर, जयंत मलैया, गोपाल भार्गव, गौरीशंकर शेजवार, कैलाश विजयवर्गीय, सरताज सिंह, नरोत्तम मिश्रा, विजय शाह, गौरीशंकर बिसेन, उमाशंकर गुप्ता, कुसुमसिंह महदेले, यशोधरा राजे सिंधिया, पारस जैन,
राजेंद्र शुक्ला, अंतरसिंह आर्य, रामपाल सिंह, ज्ञानसिंह, मायासिंह, भूपेंद्र सिंह ठाकुर
4 राज्यमंत्री
दीपक जोशी, लालसिंह आर्य, सुरेंद्र पटवा, शरद जैन
ड्राप हुए नाम
अर्चना चिटनीस, नानाभाऊ मोहोड, जगदीश देवड़ा, महेंद्र हार्डिया