शिवपुरी जिले की ग्राम पंचायत कोटा के ग्राम पिपरोनिया में आदिवासी परिवारों को 20 साल पहले सरकार ने पट्टे दिए थे। कागज में यह पट्टे बांट दिए गए, लेकिन पट्टाधारियों को भूमि पर कब्जा नहीं दिलाया गया, जिसके कारण सहरिया आदिवासी किसान और ग्रामीण परेशान थे। क्योंकि कागज में तो उनके नाम से जमीन के पट्टे बोल रहे थे। लेकिन आदिवासियों को संबंधित भूमि पर कब्जा नहीं दिलाया गया था।
राजस्व विभाग की इस कमी के कारण कई वर्षों से यह सहरिया आदिवासी ग्रामीण परेशान थे। लेकिन अब जाकर इन वास्तविक भूमि स्वामियों को प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए जमीन दिलवाई है। करीब 100 हेक्टेयर क्षेत्र की यह भूमि जो लगभग 20 करोड़ रुपये मूल्य की है, उसे अवैध कब्जाधरियों से मुक्त कराकर सीमांकन कर वास्तविक पट्टाधारियों को दिलाई गई है। शिवपुरी कलेक्टर रवींद्र कुमार चौधरी की पहल पर राजस्व विभाग एक्टिव हुआ और उसके बाद यह कार्रवाई करते हुए आदिवासियों को जमीन दिलाई गई है। सहरिया आदिवासियों को जमीन मिलने के बाद वह खुश हैं और कह रहे हैं कि अब इस जमीन पर फसल उगाकर वह अपनी आजीविका बढ़ाएंगे।
दबंगों ने घेर ली थी 100.16 हेक्टेयर भूमि
जिले के ग्राम पंचायत कोटा के ग्राम पिपरोनिया में लगभग 100.16 हेक्टेयर भूमि, जो कि ग्राम हातोद एवं ग्राम कोटा में निवासरत सहरिया आदिवासी समुदाय के 81 कृषकों को पट्टे पर प्राप्त हुई थी। लेकिन इन पद दबंगों ने कब्जा कर रखा था। कलेक्टर के सामने शिकायत आने पर कार्रवाई कर इस भूमि को अवैध कब्जेधारियों से म.प्र. भू राजस्व संहिता, 2018 की धारा 250 के अंतर्गत कब्जामुक्त कराकर मौके पर विधिवत सीमांकन कर वास्तविक भूमिस्वामियों को सुपुर्द की गई।
70 पटवारियों की बनाई गई टीम
सहरिया आदिवासियों की इस जमीन पर दबंगों का कब्जा था। कलेक्टर के निर्देश पर शिवपुरी एसडीएम अनूप श्रीवास्तव ने उक्त 81 प्रकरणों में पारित आदेशों के पालन में तहसीलदार शिवपुरी सिद्धार्थ शर्मा, राजस्व निरीक्षक प्रमोद शर्मा, राजेश वर्मा, लगभग 70 पटवारी, 50 कोटवार एवं थाना प्रभारी सुरवाया रामेन्द्र सिंह चौहान अपने दल के साथ उपस्थित होकर कार्रवाई की। आदेश के पालन में प्रभावी कार्रवाई करते हुए समस्त कृषकों को 23 दलों के माध्यम से मौके पर स्थाई सीमा चिन्हों से मिलान कर विधिवत सीमांकन कराया गया और पट्टाधारी सहरिया आदिवासियों की यह जमीन दी गई।