शिवपुरी जिले में 12 साल के बच्चे की डेंगू से मौत हो गई। इस साल जिले में डेंगू से मौत का यह पहला मामला है। फिलहाल, जिले में डेंगू मरीजों की संख्या 117 है। मृतक किशोर को ग्वालियर से एम्स दिल्ली के लिए रेफर किया गया था। लेकिन एम्स दिल्ली पहुंचने के आधा घंटे पहले ही उसने दम तोड़ दिया। वहीं, मृतक बालक के पिता ने शिवपुरी के जिला अस्पताल पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
बता दें कि 12 साल का आराध्य त्रिपाठी शहर के कृष्णपुरम कालोनी का रहने वाला था। वह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था, साथ ही वह पढ़ाई में भी अव्वल था। उसके पिता अभय त्रिपाठी ने बताया कि आराध्य की तबीयत बिगड़ने लगी थी। प्राइवेट हॉस्पिटल में उसकी जांच कराई थी, जिसमें प्लेट्स कम होने की पुष्टि हुई थी। उसके बाद रात 10 बजे जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां से ग्वालियर के कमला राजा हॉस्पिटल के लिए रेफर कर दिया गया। डेंगू की जांच की गई थी, जिसके अगले दिन रिपोर्ट पॉजिटिव रिपोर्ट आई थी।
आराध्य के हालत में सुधार नहीं आ रहा था, जिसके बाद तीन नवंबर की शाम पांच बजे उसे दिल्ली के लिए रेफर कर दिया गया था। अभय त्रिपाठी ने आगे बताया कि बेटे को लेकर रात 12:30 बजे एम्स दिल्ली पहुंच गए थे। जहां डॉक्टर ने आराध्य को आधा घंटे पहले दम तोड़ने की बात कहते हुए मौत की पुष्टि कर दी।
आराध्य के पिता अभय ने जिला अस्पताल प्रबंधन पर उपचार में लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि 20 घंटे करीब बेटे को जिला अस्पताल में भर्ती रखा गया, लेकिन उसकी जांच नहीं कराई गई। ड्यूटी डॉक्टर से अनुरोध किया था, लेकिन ड्यूटी डॉक्टर ने उपचार में लापरवाही बरती थी। बाद में उसे सीधा ग्वालियर रेफर करने के लिए लिख दिया गया।
इस मामले में सिविल सर्जन डॉ. बीएल यादव का कहना है कि बच्चे को उलटी और लूज मोशन की बिमारी बताकर भर्ती कराया गया था। नर्सिंग स्टाफ की रूटीन जांच में 101 डिग्री बुखार आया था।इसके बाद उसकी CBC जांच कराई गई थी, जिसमें 88 हजार प्लेटलेट्स थी और फोलिमोर में गड़बड़ी थी। इसके चलते बच्चे को तत्काल ग्वालियर रेफर करने का फैसला डॉक्टर ने लिया था।