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देख लो सरकार: इंसाफ मांगने कलेक्ट्रेट पहुंचा था बुजुर्ग, नहीं हुई सुनवाई; तंग आकर जहर खाया और हो गई मौत

Tue, 26 May 2026 08:41 PM IST
श्योपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्योपुर

सार

श्योपुर में पुश्तैनी दुकान विवाद से परेशान 60 वर्षीय देवेंद्र गोयल जनसुनवाई में न्याय की उम्मीद लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां कथित रूप से जहरीला पदार्थ खाने के बाद उनकी मौत हो गई। कलेक्ट्रेट गेट पर खड़ी उनकी साइकल व्यवस्था पर सवाल छोड़ गई।

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मृतक की साइकिल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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न्याय की आखिरी उम्मीद लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे एक बुजुर्ग की जिंदगी वहीं थम गई। जनसुनवाई में अपनी पुश्तैनी दुकान के विवाद की फरियाद लेकर आए 60 वर्षीय देवेंद्र गोयल ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट के पिलर से टिकी उनकी साइकिल अब भी इंसाफ का इंतजार करती नजर आ रही है।

ढोढर कस्बे के मूल निवासी देवेंद्र गोयल लंबे समय से श्योपुर के टोड़ी गणेश बाजार में परिवार के साथ रह रहे थे। उनकी पत्नी पिंकी गोयल के मुताबिक, देवेंद्र रोज साइकल से गली-मोहल्लों में गोली-बिस्किट बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। परिवार के पास मौजूद एक दुकान ही उनकी आय का बड़ा सहारा थी।

पत्नी के अनुसार, उनके ससुर ने हाथ से लिखे दस्तावेज में तीनों बेटों को एक-एक दुकान दी थी। देवेंद्र पहले अपनी दुकान खुद चलाते थे, बाद में उसे किराए पर दे दिया था। आरोप है कि भाई की मौत के बाद भतीजों ने दुकान का ताला तोड़कर कब्जा कर लिया और किराएदार को भी हटा दिया।

इसके बाद देवेंद्र ने नगर पालिका, तहसील, एसडीएम कार्यालय सहित कई दफ्तरों के चक्कर लगाए। उन्होंने कई आवेदन दिए, गुहार लगाई, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। परिजनों का कहना है कि दुकान छिन जाने के बाद से वह लगातार तनाव में थे।

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मंगलवार को वह घर से यह कहकर निकले थे कि जनसुनवाई में आखिरी बार न्याय मांगने जा रहे हैं। कुछ देर बाद उनकी साइकल कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर खड़ी मिली, जबकि वह गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती थे। इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

हैरानी की बात यह है कि देवेंद्र को अस्पताल कौन लेकर पहुंचा, इसकी जानकारी अब तक न परिवार को है और न पुलिस को। जनसुनवाई में मौजूद अधिकारी भी ऐसे किसी फरियादी के पहुंचने की पुष्टि नहीं कर रहे हैं। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। अस्पताल में पत्नी पिंकी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। पत्नी का कहना है कि अगर समय रहते उनकी सुनवाई हो जाती तो आज देवेंद्र जिंदा होते।

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