इंदौर हाईकोर्ट ने बिना विभागीय जांच वेतनवृद्धि रोकने के कलेक्टर के आदेश पर रोक लगाई। 30 साल की सेवा वाले कर्मचारी को दी गई सजा पर कोर्ट सख्त हुआ और 15 दिन में जवाब तलब किया।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने शाजापुर कलेक्टर ऋजु बाफना द्वारा जारी उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें बिना विभागीय जांच के एक कर्मचारी की वेतनवृद्धि रोक दी गई थी। न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई ने 25 मार्च 2026 को सुनवाई करते हुए कलेक्टर से 15 दिन के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
30 साल की सेवा के बाद कार्रवाई को दी चुनौती
क्या है पूरा मामला?
शिकायत के बाद कलेक्टर ने नियम 14 के तहत आरोप-पत्र जारी किए बिना केवल कारण बताओ नोटिस जारी किया। जांच अधिकारी की रिपोर्ट में 35,000 और 15,000 रुपये की रिश्वत के आरोप सिद्ध नहीं पाए गए, इसके बावजूद 27 फरवरी 2025 को ‘संचयी प्रभाव के साथ दो वेतनवृद्धियां रोकने’ की सजा दे दी गई, जो कानूनी रूप से बड़ी सजा मानी जाती है।
अगले ही दिन 28 फरवरी को बघेरवाल को गुलाना एसडीओ कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया। आरटीआई में यह भी सामने आया कि शिकायत में जिन वीडियो रिकॉर्डिंग का उल्लेख था, वे आधिकारिक रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं थीं। इसके अलावा, 30 साल की सेवा पूरी होने पर 18 दिसंबर 2025 को जारी तृतीय समयमान वेतन आदेश में भी उनका नाम शामिल नहीं किया गया, जबकि जूनियर कर्मचारियों को इसका लाभ दिया गया।
पहले भी लग चुकी है फटकार