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Shahdol: भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा पीएम आवास, अधिकारियों पर योजना के आवंटित रुपयों का बंदरबांट करने का आरोप

Sat, 14 Dec 2024 04:18 PM IST
शहडोल ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शहडोल

सार

Shahdol News: रोजगार सहायक और प्रभारी पंचायत सचिव अमरजीत मिश्रा का कहना है कि मकान की दो किस्त हितग्राही को जारी की जा चुकी हैं और अब छत की ढलाई होने पर तीसरी किस्त जारी की जाएगी। लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है।
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बंजर पड़ी पीएम आवास योजना की जमीन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शहडोल जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत एक गरीब हितग्राही को आवास देने की योजना भ्रष्टाचार की आंधी में उड़ गई। यह मामला बुढ़ार जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्राम पंचायत बरगंवा 18 के ग्राम जमुड़ी का है। जहां वार्ड-17 निवासी दशरथ सिंह के नाम पर आवास स्वीकृत हुआ था, वह आज अपना गांव छोड़ने को मजबूर हैं। आरोप है कि पंचायत के अधिकारियों ने उनके आवास निर्माण के लिए आवंटित राशि का बंदरबांट कर लिया।

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भ्रष्टाचार के खेल में ‘मिट गया’ आवास का अस्तित्व
ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक और प्रभारी सचिव अमरजीत मिश्रा ने दावा किया कि दशरथ सिंह के मकान की दो किस्तें जारी हो चुकी हैं। छत की ढलाई के लिए तीसरी किस्त दी जानी है, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। आवास निर्माण के नाम पर जमीन खाली पड़ी है, जहां मकान का कोई निशान तक नहीं है। स्थानीय लोगों ने बताया कि दशरथ को जब इस गड़बड़ी का पता चला, तो वह इस अन्याय से इतना आहत हुआ कि उसने अपना गांव ही छोड़ दिया।
 
हितग्राही के पैसे का बंदरबांट
दशरथ सिंह के नाम पर स्वीकृत आवास की राशि पंचायत सचिव और उनके सहयोगियों द्वारा कथित रूप से हड़प ली गई। सचिव का कहना है कि निर्माण छत स्तर तक हो चुका है, लेकिन मौके पर केवल बंजर जमीन दिखाई दे रही है। यह दावा सच्चाई से कोसों दूर है और भ्रष्टाचार की गहराई को उजागर करता है।
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पंचायत में अन्य निर्माण कार्यों पर भी उठे सवाल
यह मामला पंचायत में जारी भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। दशरथ सिंह के आवास का पैसा गबन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ जांच और सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है। साथ ही, पंचायत द्वारा कराए गए अन्य निर्माण कार्यों की भी जांच आवश्यक है ताकि अन्य अनियमितताओं को उजागर किया जा सके।
 
पंचायत सचिव के बयान पर उठे सवाल
पंचायत सचिव अमरजीत मिश्रा से जब इस मामले पर सवाल किए गए तो उन्होंने पहले निर्माण कार्य पूरा होने का दावा किया। लेकिन जब खाली पड़ी जमीन के प्रमाण दिखाए गए तो उन्होंने सवालों से बचने की कोशिश की। उनकी यह स्थिति भ्रष्टाचार के आरोपों को और पुख्ता करती है।
 
कब मिलेगा पीड़ित को न्याय?
एक गरीब के आशियाने का सपना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। सवाल यह है कि ऐसे मामलों में गरीबों के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार और प्रशासन कब कदम उठाएंगे? दोषियों के खिलाफ त्वरित जांच और कार्रवाई न केवल दशरथ सिंह को न्याय दिलाएगी, बल्कि अन्य हितग्राहियों के प्रति विश्वास भी बहाल करेगी।

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