किसान बस ये तरीका अपनाएं
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कृषि वैज्ञानिक आगे बताते हैं कि इसके अलावा दीर्घकालीन शीतलहर और पाले से फसलों के बचाव की बात करें तो उत्तर पश्चिम से जो हवाएं आती हैं, उसे रोकने के लिए शहतूत के पेड़ हुए या बबूल हुआ मुनगा के पौधे हुए, जामुन का वृक्ष हुआ, उसे अगर खेतों पर लगाते हैं तो निश्चित रूप से वो इन हवाओं को आने से रोकेंगे, जिससे हम फसल की सुरक्षा कर सकते हैं। उसके अलावा हमारे नर्सरी के जो पौधे हैं, वह बहुत ही छोटे होते हैं। उनको पाले से बचाने के लिए उपाय कर सकते हैं कि वहां पर जूट की बोरी लगा दें, जिससे हवा रुकेगी और कोशिश करें कि जो हमारे नर्सरी के पौधे तैयार करने होते हैं, उन्हें लो कास्ट टनल पॉलिथीन के अंतर्गत रोपण करना चाहिए। इसके अलावा हमें पैरा का भी बिछाव कर देना चाहिए, पॉलिथीन से ढक देना चाहिए।
रासायनिक दवाओं से पाले के प्रभाव को ऐसे करें कम...
कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर बीके प्रजापति बताते हैं, इसके अलावा अगर हम केमिकल्स या रसायन के माध्यम से पाले के प्रभाव को कम करना चाहते हैं, तो हमें थायो यूरिया की एक ग्राम मात्रा दो लीटर पानी में घोलकर के 15 दिन के अंतराल में फसल पर छिड़काव करना चाहिए। इसके अलावा सल्फर डस्ट जो होता है, छह से आठ केजी प्रति एकड़ की दर से हमें छिड़काव करना होता है। 15 दिन के अंतराल में ही इसका भी छिड़काव किया जा सकता है और अगर हमारे पास घुलनशील सल्फर उपलब्ध है तो घुलनशील सल्फर की दो ग्राम मात्रा एक लीटर पानी में लेकर हम 15 दिन के अंतराल में छिड़काव करते रहें। फसल पर तो फसलों को फायदा होगा, इन उपायों को अपनाकर न केवल हम अपने फसलों से पाले के प्रभाव को कम कर सकते हैं, बल्कि सल्फर जो है पौधे की वृद्धि के लिए बहुत फायदेमंद होता है, इसके अलावा पौधों में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए भी ये दवाएं काम करती हैं, जिससे हम अपनी फसलों को पाले से तो बचा ही सकते हैं। साथ ही फसलों में लगने वाली और कीट बीमारियों से भी बचाया जा सकता है, जिससे हमारा पौधा भी तेजी से ग्रो करता है।
धुआं से ऐसे करें फसल सुरक्षित...
कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर बीके प्रजापति आगे बताते हैं, फसलों को इस मौसम में पाले से बचाने के लिए एक उपाय और कर सकते हैं कि रात के समय जो पुआल होते हैं पैरा हो या गेहूं का पुआल हो, उनको अगर हम उत्तर पश्चिम कि दिशा में मेढ़ पर रखकर जलाते हैं तो निश्चित रूप से जो हमारी वायुमंडलीय हवा होती है वो वातावरण को गर्म करती है, जिससे पाले के प्रभाव को कम किया जा सकता है।