लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग शहडोल के कार्यपालन यंत्री एबी निगम के पास झारखंड के रांची स्थित पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल कार्यालय के कार्यपालन अभियंता शशि शेखर सिंह की ओर से मेल के जरिए भेजे गए एक पत्र के वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया। पत्र में शहडोल जिले के जैसिंहनगर विकासखंड के ग्राम गिरूई खुर्द में ढाई सौ करोड़ रुपये से अधिक के कार्य के अनुभव प्रमाण पत्र की सत्यता बताए जाने की बात पूछी गई है।
दरअसल, जमीनी हकीकत में वह कार्य पूरे हुए ही नहीं हैं। हां इतना अवश्य है कि अपनी कुर्सी पर खतरा मंडराते देख कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग शहडोल एबी निगम ने विभाग के एक एसडीओ को अनुभव पत्र जांच की जिम्मेदारी सौंप दी है। जो हफ्ते भर से अधिक समय गुजरने के बाद भी ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है।
ये है पूरा मामला...
शहडोल के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री एबी निगम के पास बीते दो जनवरी 2023 को झारखंड के रांची स्थित पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल कार्यालय के कार्यपालन अभियंता शशि शेखर सिंह की ओर से मेल के जरिए एक पत्र भेजा गया है। इसमें उल्लेखित किया गया कि उनके विभाग के एक बड़े टेंडर में एनएस इन्टरप्राइजेज ग्राम पोस्ट आलेंदा फतेहपुर सीकरी जिला आगरा उत्तर प्रदेश की ओर से कार्यपालन यंत्री पीएचई कार्यालय शहडोल द्वारा जारी हस्ताक्षर एवं मुद्रित सील सहित एक अनुभव प्रमाण पत्र लगाया गया है, जिसमें शहडोल के जैसिंहनगर विकास खंड अंतर्गत ग्राम गुरुई खुर्द में 21 सितंबर 2018 से 20 सितंबर 2021 की अवधि में दो अरब, छियालिस करोड़, सत्तासी लाख, छियानबे हजार, तीन सौ इक्यासी रुपये का कार्य करने का अनुभव उल्लेखित है। इस कार्य अनुभव प्रमाण पत्र की सत्यता बताने का कष्ट करें, जिसके बाद चार जनवरी 2023 को अनुभव प्रमाण पत्र की पुष्टि करते हुए एक सत्यापित मेल झारखंड प्रेषित किया गया।
वायरल पत्र के बाद उठे सवाल...
कार्यपालन यंत्री की ओर से जारी कथित अनुभव प्रमाण पत्र व मेल के आदान-प्रदान की जानकारी जैसे ही वायरल हुई, विभाग में खलबली मच गई। क्योंकि जिस कार्य का अनुभव प्रमाण पत्र जारी हुआ है, वह कार्य अभी तक जमीन में पूरे हुए ही नहीं हैं। जब यह कार्यानुभव प्रमाण पत्र वायरल हो गया तो फिर इसकी सत्यता को लेकर सवाल खड़े होने लगे। साथ ही इनके करोड़ों के भुगतान की स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, कार्य जमीन में अब तक पूरे ही नहीं हुए हैं। फिर कैसे यह अनुभव प्रमाण पत्र ठेकेदार को जारी कर दिया और अगर ठेकेदार ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र बनवाया है तो फिर जानकारी के बाद उसके ऊपर कार्यपालन यंत्री एबी निगम की ओर से एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई गई। जबकि ठेकेदार वर्तमान समय में जैसिंहनगर ब्लॉक में कार्य भी कर रहा है। ऐसा तो नहीं की कार्यपालन यंत्री एबी निगम की ओर से अपनी कुर्सी और चहेते ठेकेदार को बचाने के लिए केवल एसडीओ को जांच सौंपकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। इससे यह संदेह भी हो रहा है कि स्वयं कार्यपालन यंत्री की ओर से कहीं नियम के खिलाफ ठेकेदार से आर्थिक लाभ हासिल करके यह फर्जी प्रमाण पत्र जारी किया था।
क्योंकि जो तथा-कथित हस्ताक्षर और मुद्रा युक्त मेल झारखंड भेजा गया है, उसके हस्ताक्षर और कार्यपालन यंत्री निगम की ओर से अन्य दस्तावेजों में किए गए हस्ताक्षर एक दम मेल खा रहे हैं। अगर यह अनुभव प्रमाण पत्र फर्जी तरीके से ठेकेदार ने बनवाया है तो फिर आखिर उसके खिलाफ अभी तक कोई कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई। जबकि वह आज भी जिले में पीएचई विभाग का कार्य कर रहा है। ठेकेदार की ओर से फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया गया है। जांच करवाकर उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई कराई जाएगी।