रथ यात्रा में अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा, राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, इंदर सिंह परमार, पंडित दुर्गा प्रसाद कटारे सहित अन्य साधु संतों को आमंत्रित किया गया है जो शामिल रहेंगे। रथ यात्रा को लेकर मंदिर में भव्य रूप से लाइटों से सजाया गया है, रंग-बिरंगी रोशनी से मंदिर की शोभा देखते ही बन रही है।
नगर भ्रमण पर रथ में बलदाऊ भैया, बहन सुभद्रा के साथ जगतपति जगन्नाथ स्वामी को विराजमान किया जाएगा और उसके बाद शहर के छावनी से मंडी तक करीब तीन-चार किलोमीटर मार्ग पर विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों द्वारा पुष्प वर्षा कर स्वागत किया जाएगा। इस वर्ष रथ को खिचने का इंतजाम किया गया है। भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ तीन रथों पर सवार होते हैं।
सुबह मंदिर परिसर में विशेष आरती का आयोजन किया जाएगा और उसके पश्चात रथ यात्रा निकाली जाएगी। इस संबंध में जानकारी देते हुए समाज की ओर से शिव परमार मुरली, जेपी परमार, विष्णु परमार रोलूखेड़ी ने बताया कि भव्य आयोजन को लेकर प्रांतीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद परमार, मंडलोई चंदर सिंह परमार, पूर्व अध्यक्ष तुलसीराम पटेल आदि की सहमति से इस बार जगदीश मंदिर समिति का अध्यक्ष अनार सिंह परमार और रथ यात्रा चल समारोह का अध्यक्ष हरीश परमार को बनाया गया है।
रथ यात्रा की तैयारियों को लेकर शहर सहित आस-पास के स्थानों पर तैयारियां जारी है। मंदिर के आस-पास के स्थान पर समाजजनों ने द्वारा साफ-सफाई कर मैदान का समतलीकरण कराया और समाजजनों की एक बैठक का आयोजन भी किया गया। इस मौके पर यहां पर मौजूद समाजजनों ने बताया कि करीब 60 साल से निरंतर भगवान जगदीश की रथ यात्रा निकाली जा रही है। इस मौके पर इस साल भी परम्परानुसार भगवान की यात्रा आस्था के साथ निकाली जाएगी। उन्होंने बताया कि उन्होंने बताया कि भगवान जगदीश स्वामी की रथ यात्रा 1961 में मंदिर के जीर्णोद्धार के साथ शुरू की थी। रथ यात्रा का सामाजिक संगठनों द्वारा जगह-जगह स्वागत किया जाएगा। परमार समाज के राज गुरु 232 मंदिरों के जीर्णोद्धार व अखिल भारतीय धर्म संघ के अध्यक्ष ब्रह्मलीन श्री 1008 पंडित काशीप्रसाद कटारे की प्रेरणा से इस मंदिर का जीर्णोद्धार सन 1961 में परमार समाज ने किया था।
यात्रा दोपहर जगदीश मंदिर सब्जी मंडी से शुरू होकर नमक चौराहा, बड़ा बाजार होते हुए शहर के मंडी स्थित बाबा मंदिर पहुंचेगी। आगामी सात जुलाई को सुबह भगवान को स्नान और अभिषेक कराने के बाद सिंहासन पर बैठाया जाएगा, जहां पर हवन, पूजन के साथ पूजा अर्चना की जाएगी।