पॉक्सो न्यायालय के विशेष न्यायाधीश अभिलाष जैन ने अपने फैसले में स्कूल से घर जा रही नाबालिग पीड़िता का हाथ पकड़कर छेड़छाड़ करने वाले आरोपी को तीन वर्ष का सश्रम कारावास एवं 500 रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है।
विशेष लोक अभियोजन अधिकारी केदार सिंह कौरव ने बताया कि घटना का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है कि पीड़िता ने 23 मार्च 2024 को थाना कोतवाली में इस आशय का आवेदन पत्र प्रस्तुत किया कि वह अपनी तीन छोटी बहनों के साथ बस में बैठकर स्कूल से अपने घर जा रही थी और जब बस से उतरी तो गांव का मनोज परमार पिता बद्री परमार (34) अपने दोस्तों के साथ रास्ते में खड़ा था। पीड़िता अपनी बहनों के साथ मनोज के बगल से निकली तो मनोज ने उसका हाथ पकड़ लिया, जिससे यह घबरा गई और अपनी बहनों के साथ भागकर घर आ गई, घर जाकर उसने उक्त बात अपनी दादी को बताई जो पीड़िता को लेकर मनोज परमार के घर गईं पर मनोज परमार घर पर नहीं मिला। शाम को जब दादाजी घर आए तो उसने घटना की जानकारी उन्हें दी और उनके साथ आरक्षी केन्द्र कोतवाली उपस्थित हुई। पुलिस ने अनुसंधान पश्चात अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य एवं अंतिम लिखित तर्कों से सहमत होते हुए न्यायालय द्वारा आरोपी मनोज परमार को दोषी पाते हुए धारा 7/8 पॉक्सो अधिनियम में तीन वर्ष का सश्रम कारावास एवं धारा 354 भादवि में 1 वर्ष का सश्रम कारावास एवं कुल 500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया। न्यायालय द्वारा पीड़िता के उज्जवल भविष्य व शिक्षा हेतु प्रतिकर स्वरूप 1,00,000 एक लाख रुपये दिलवाए जाने के लिए आदेश पारित किया गया।