सीहोर जिले में वर्तमान समय में मौसम में लगातार परिवर्तन होने के कारण गेहूं और चने की फसल में कीटों का प्रकोप अत्यधिक तेजी से फैल रहा है। इससे किसान चिंतित हैं। वैज्ञानिकों को गेहूं में तम्बाकू की इल्ली और चने में सुण्डी इल्ली का प्रकोप देखने को मिला।
कृषि विज्ञान केन्द्र सेवनियां के वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के ग्रामीण अधिकारियों द्वारा इछावर एवं सीहोर विकासखंड के ग्राम मोगराराम, आमाझिर, जहांगीरपुरा, धबोटी, पालखेड़ी, आमलारामजीपुरा, छापरी, जमुनिया, हटे सिंह, भाऊखेड़ी और गोलूखेड़ी में किसानों के खेतों पर फसलों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान गेहूं की फसल पर तम्बाकू की इल्ली और चने की सुण्डी इल्ली का प्रकोप देखने को मिला। चना फसल में कटुआ इल्ली और चने की सुण्डी इल्ली के साथ-साथ उकठा, कॉलन रॉट और शुष्क जड़ सड़न रोग का प्रकोप देखा गया।
इस दौरान वैज्ञानिक (पौध संरक्षण) दीपक कुशवाह ने सलाह दी है कि गेहूं फसल में कीटों के प्रकोप की रोकथाम के लिए इमामेक्टिन बेन्जोएट पांच एससी 100 ग्राम प्रति एकड़ या प्रोफेनोफॉस 40 साइप्रोथीन 400 मिली प्रति एकड़ मात्रा, चना फसल में कीटों के रोकथाम के लिए इण्डोक्साकार्ब 140 मिली प्रति एकड़ या फ्लूबेन्डामाइट 60 मिली प्रति एकड़ के साथ अनुशंसित फफूंद नाशक थायोफिनेट मिथाइल 400 ग्राम प्रति एकड़ की दर से 150-200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव करें।