भोपाल-इंदौर हाईवे पर हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। गुरुवार की दोपहर डोडी के पास एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। ढाकनी (बफापुर) निवासी युवक पंकज मालवीय अपनी मां इमरतबाई (42) के साथ शेकूखेड़ा गांव में रसोई (तेरहवीं) के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निकला था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। रास्ते में अज्ञात कंटेनर ने उनकी बाइक को इतनी जोरदार टक्कर मारी कि मां की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बेटा लहूलुहान होकर सड़क पर गिर पड़ा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा इतना भीषण था कि टक्कर के बाद बाइक कई फीट दूर जा गिरी। कंटेनर चालक बिना रुके मौके से फरार हो गया। डोडी चौकी पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और घायल युवक को सिविल अस्पताल आष्टा भेजा गया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। महिला इमरतबाई की मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, घर में मातम छा गया।
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डोडी चौकी प्रभारी एसआई दिनेश यादव ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। घायल पंकज मालवीय को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया और मृतका का पंचनामा बनाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस ने अज्ञात कंटेनर चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। आसपास के सीसीटीवी कैमरों की जांच भी की जा रही है ताकि फरार वाहन को पकड़ा जा सके।
रफ्तार बनी मौत का कारण
भोपाल-इंदौर हाईवे जिले का सबसे व्यस्त मार्ग है। तेज रफ्तार और लापरवाह ड्राइविंग के कारण यहां रोजाना हादसे हो रहे हैं। प्रशासन और पुलिस की चेतावनियों के बावजूद कई वाहन चालक नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं। वे सड़क पर मानो रेस का मैदान समझकर वाहन दौड़ाते हैं, नतीजा यह होता है कि मासूम लोग अपनी जान गंवा देते हैं।
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हादसों का सिलसिला जारी
सीहोर जिले में पिछले एक माह में हाईवे पर तीसरा बड़ा हादसा हुआ है। हर बार लापरवाह ड्राइविंग, तेज रफ्तार और पुलिस की निगरानी की कमी सामने आती है। लोगों का कहना है कि हाईवे पर लगातार पेट्रोलिंग और स्पीड ब्रेकरों की जरूरत है, ताकि ऐसे हादसों पर अंकुश लगाया जा सके।
गांव में पसरा मातम
ढाकनी गांव में जैसे ही यह खबर पहुंची कि इमरतबाई अब नहीं रहीं, पूरा गांव गमगीन हो गया। परिजन और ग्रामीणों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। कुछ घंटे पहले जो मां-बेटा खुशी-खुशी रिश्तेदारी में जा रहे थे, अब एक सन्नाटा बनकर रह गए हैं। गांव की महिलाएं कहती हैं कि रसोई में शामिल होने जा रही थी बहनजी, किसे पता था खुद का चूल्हा ठंडा छोड़ जाएंगी। यह हादसा एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि कब थमेगी हाईवे पर मौत की यह रफ्तार?