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Sehore News: मूंग की फसल बनी किसानों की आर्थिक रीढ़, 679 करोड़ की हुई खरीदी, तीसरी फसल से बढ़ा आत्मविश्वास

Wed, 06 Aug 2025 05:54 PM IST
सीहोर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर

सार

सीहोर में तीसरी मूंग फसल ने किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारी है। 35 हजार हेक्टेयर में बुआई हुई, 27,147 किसानों ने 75,911 मैट्रिक टन मूंग बिक्री की। समर्थन मूल्य से किसानों को लाभ मिला, बावजूद जलस्तर गिरने की चिंता, मूंग की खेती बढ़ रही है।
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जायद की तीसरी फसल बनी किसानों की संबल
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विस्तार
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सीहोर जिले में गर्मियों के मौसम में ली जा रही तीसरी मूंग फसल ने हजारों किसानों की आर्थिक तस्वीर बदल दी है। बीते एक दशक में मूंग की खेती लगातार बढ़ती जा रही है। जहां पहले यह फसल सीमित रकबे में बोई जाती थी, वहीं अब करीब 35 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी बुआई की जा रही है।

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सरकारी समर्थन मूल्य पर 27147 किसानों ने 75911 मैट्रिक टन मूंग की बिक्री की है। यह खरीदी 4 जुलाई तक दर्ज हुई, जबकि खरीदी की अंतिम तिथि 8 अगस्त निर्धारित है। ऐसे में यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है। इस खरीदी के एवज में किसानों को लगभग 679 करोड़ रुपये का भुगतान होना है, जिसमें से 379 करोड़ का भुगतान हो चुका है, जबकि शेष राशि प्रक्रिया में है। कृषि उपज मंडियों में मूंग की कीमतें 5500 से 6500 रुपये प्रति क्विंटल थीं। वहीं, सरकार ने 8682 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर खरीदी कर किसानों को राहत दी। इससे किसानों को प्रति क्विंटल औसतन 2500 से 3000 रुपये का सीधा लाभ मिला है।
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63 केन्द्रों पर हो रही खरीदी, 83838 हेक्टेयर में बोवनी
जिले में कुल 63 खरीदी केन्द्रों पर मूंग की खरीदी की जा रही है। इस वर्ष 83838 हेक्टेयर में मूंग की बोवनी हुई थी। मूंग की पंजीयन प्रक्रिया 19 जून से प्रारंभ होकर 6 जुलाई तक चली, जिसके बाद 7 जुलाई से खरीदी शुरू हुई। कई स्थानों पर खरीदी 14 जुलाई से शुरू हुई थी। कृषि विभाग के अनुसार, 31 जुलाई तक 32553 किसानों ने पंजीयन कराया था, जिसमें से 30516 किसानों ने स्लॉट बुकिंग की। खरीदी केन्द्रों पर मूंग तुलवाने वाले किसानों की संख्या 27147 रही। अब तक 57% भुगतान पूरा हो चुका है, और शेष राशि के लिए 529 करोड़ के ईपीओ पर डिजिटल हस्ताक्षर हो चुके हैं।
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जलस्तर पर असर, पर लाभ देखकर नहीं रुक रहे किसान
मूंग के बढ़ते रकबे से एक ओर जहां किसानों को आमदनी हो रही है, वहीं दूसरी ओर जल स्तर गिरने की चुनौतियां भी सामने आई हैं। फिर भी तीसरी फसल के रूप में मूंग किसानों के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध हो रही है, जिससे उनका रुझान लगातार बढ़ रहा है।

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