ज्योतिषाचार्य डॉ पंडित गणेश शर्मा
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बसंत पंचमी का त्योहार बसंत के महीने में मनाया जाता है। ये पर्व इस बार रविवार 2 फरवरी को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में बसंत पंचमी के पर्व का बहुत ही खास महत्व है। इसे सरस्वती पूजा के नाम से जाना जाता है। इस दिन विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा विधि-विधान के साथ की जाती है।
सनातन धर्म ज्योतिष पद्म भूषण स्वर्ण पदक प्राप्त ज्योतिषाचार्य पंडित गणेश शर्मा ने बताया कि माता सरस्वती को ज्ञान और विद्या की देवी माना जाता है। सरस्वती पूजा के दिन सरस्वती जी की आराधना करने से साधक को बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होती है। विद्यार्थियों के लिए ये पर्व बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। पंडित शर्मा के अनुसार बसंत पंचमी का त्योहार हर वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस साल इस तिथि की शुरुआत 2 फरवरी को सुबह 9 बजकर 14 मिनट पर होगा। इसका समापन 3 फरवरी सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर होगा। ऐसे में बसंत पंचमी का पर्व 2 फरवरी को मनाया जाएगा। सरस्वती पूजा का मुहूर्त प्रातः 7 बजकर 8 मिनट से आरंभ होगा और दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा।
बसंत पंचमी पूजा विधि
बसंत पंचमी के दिन सुबह स्नान के बाद पीले रंग का वस्त्र धारण करना चाहिए। उसके बाद साफ सफाई करके साफ चौकी पर माता सरस्वती की प्रतिमा को स्थापित करें। फिर माता सरस्वती को चंदन, हल्दी, केसर, चंदन, पीले या सफेद रंग के अर्पित करना चाहिए। इस दिन माता सरस्वती के सामने पुस्तक रखना चाहिए। अंत में माता सरस्वती की पूजा करने के बाद आरती करनी चाहिए। माता सरस्वती को पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं।
बसंत पंचमी महत्व
सनातन धर्म में बसंत पंचमी के पर्व का बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। बसंत पंचमी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है। बसंत पंचमी के दिन से ही बसंत ऋतु की शुरुआत होती है। ये पर्व माता सरस्वती की पूजा को समर्पित होता है। इस दिन सरस्वती पूजा करने से साधक को ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति होती है।