जिस उम्र में गोद में नाती-पोते खेलते हैं, आंखों की रोशनी धुंधली पड़ने लगती है, शरीर की काया जीर्ण-शीर्ण हो जाती है, उस उम्र में भी जिले के बुजुर्गों ने साक्षर बनने की अनोखी मिसाल पेश की। रविवार को जिलेभर के दादा-दादी, नाना-नानी और अन्य बुजुर्ग प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों में आयोजित परीक्षा में शामिल हुए।
24,064 परीक्षार्थियों ने दी परीक्षा
नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत जिले के 1,560 प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों में परीक्षा आयोजित की गई। सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक बुजुर्गों समेत नव साक्षरों ने परीक्षा दी। इस परीक्षा के लिए 24,160 परीक्षार्थियों का पंजीयन हुआ था, जिनमें से 24,064 परीक्षार्थियों ने परीक्षा में भाग लिया। परीक्षा के दौरान जिला स्तरीय एवं विकासखंड स्तरीय टीमों ने विभिन्न केंद्रों का निरीक्षण किया।
भैरूंदा ब्लॉक में 100% उपस्थिति
जिला परियोजना समन्वयक आर. आर. उईके ने बताया कि भैरूंदा विकासखंड के 324 केंद्रों पर 4,250 में से सभी परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी। अन्य विकासखंडों की स्थिति भी उत्साहजनक रही:
आष्टा विकासखंड: 6,600 में से 6,625 परीक्षार्थी उपस्थित
बुधनी विकासखंड: 2,460 में से 2,430 परीक्षार्थी उपस्थित
इछावर विकासखंड: 3,200 में से 3,189 परीक्षार्थी उपस्थित
सीहोर विकासखंड: 7,590 में से 7,560 परीक्षार्थी उपस्थित
कुल मिलाकर पूरे जिले में 24,160 में से केवल 96 नवसाक्षर अनुपस्थित रहे।
महिलाएं बच्चों को गोद में लेकर परीक्षा देने पहुंचीं
परीक्षा में महिलाओं की भागीदारी सबसे अधिक रही। कई महिलाएं अपने छोटे बच्चों को गोद में लेकर परीक्षा केंद्रों पर पहुंचीं। जिला परियोजना समन्वयक आर. आर. उईके ने बताया कि महिलाएं अपनी सुविधा अनुसार सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच परीक्षा देने आ सकती थीं। इस परीक्षा में किसी को असफल नहीं किया जाता, बल्कि ग्रेडिंग प्रणाली अपनाई जाती है।
साल में दो बार आयोजित होती है परीक्षा
केंद्र सरकार के निर्देशानुसार 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षर व्यक्तियों को बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान प्रदान करने के लिए ‘उल्लास-नवभारत साक्षरता कार्यक्रम’ चलाया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत साक्षरता दर बढ़ाने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम को वर्ष 2022 से 2027 तक लागू किया गया है।
यूनेस्को की परिभाषा के अनुसार, इस कार्यक्रम का उद्देश्य असाक्षर व्यक्तियों को मुद्रित एवं लिखित सामग्री का उपयोग करके पहचानने, समझने, व्याख्या करने, संवाद करने और गणना करने में सक्षम बनाना है। इस कार्यक्रम के तहत वर्ष में दो बार बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता मूल्यांकन परीक्षा आयोजित की जाती है। इस परीक्षा में भाग लेने वाले सभी परीक्षार्थियों ने अपने उत्साह और प्रयास से यह साबित कर दिया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।