केन्द्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के क्षेत्र बकतरा में दलितों के बहिष्कार का सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक दलित परिवार द्वारा दबंगों के घर के सामने मकान बनाने की सजा के रूप में क्षेत्र के सभी दलितों का हुक्का-पानी बंद कर दिया गया है। आरोप है कि किरार समाज के लोगों ने पंचायत बुलाकर फैसला सुनाया कि अनुसूचित जाति (बंशकार) समाज के लोगों को राशन, पानी, आटा, दाल, किराना सामान आदि न दिया जाए और न ही उन्हें किसी काम के लिए बुलाया जाए। इस आदेश का उल्लंघन करने पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाने का फरमान जारी किया गया।
कलेक्ट्रेट पहुंचे पीड़ित, कार्रवाई की मांग
इस अमानवीय फैसले के विरोध में ग्रामीणों ने शनिवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर बांस शिल्पकार युवा शक्ति संगठन धानुक समाज प्रदेश अध्यक्ष मुकेश बंसल और धानुक समाज प्रदेश सचिव व भाजपा जिला महामंत्री रवि नागले के नेतृत्व में कलेक्टर बालागुरु के. को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में तीन दिनों के भीतर दोषियों पर सख्त कार्रवाई और पीड़ितों को पुलिस सुरक्षा देने की मांग की गई। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशभर में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
मकान बनाने से रोका, डंडों से हमला
कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्राम बकतरा के राधेश्याम बंशकार ने बताया कि 24 फरवरी की शाम उनके पड़ोसी रूप सिंह ने उनके घर आकर मकान बनाने से मना किया। रूप सिंह ने जातिसूचक गालियां देते हुए कहा कि "तुम नीच जाति के हो, मेरे घर के सामने मकान नहीं बना सकते।" जब राधेश्याम ने विरोध किया तो रूप सिंह ने अपने बेटों सोनू चौहान और प्रभात चौहान, तथा भाई मोहन चौहान को बुला लिया। इसके बाद चारों ने मिलकर डंडों और मुक्कों से राधेश्याम और उनके परिवार पर हमला कर दिया। इस मारपीट में बीच-बचाव करने आए दीनबंधु, सागर, सुख्तीबाई, दुर्गेश और प्रेम सिंह घायल हो गए। घटना की रिपोर्ट शाहगंज थाने में दर्ज कराई गई। थाना प्रभारी पंकज वाडेकर ने बताया कि मारपीट के मामले में दोनों पक्षों के छह लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है।
गांव में एलान कर कराया हुक्का-पानी बंद
पीड़ितों ने आरोप लगाया कि मारपीट की घटना के बाद किरार समाज के लोगों ने पंचायत बुलाकर अनुसूचित जाति के लोगों का बहिष्कार करने का फैसला लिया। गांव में सार्वजनिक एलान कर दिया गया कि बंशकार समाज के लोगों को कोई भी दुकानदार राशन-पानी नहीं देगा और न ही कोई उन्हें अपने खेतों में काम पर बुलाएगा। यदि कोई इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो उसे एक लाख रुपये का जुर्माना भरना होगा। इस फरमान के बाद गांव के दुकानदारों ने अनुसूचित जाति के लोगों को राशन देना बंद कर दिया, यहां तक कि पीने के लिए पानी भरने भी नहीं दिया जा रहा है। भय के माहौल के कारण कई दलित परिवार गांव छोड़कर अपने रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं।
प्रशासन से न्याय की गुहार
पीड़ितों ने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और गांव में दलितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।