शहर की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, नगर सुधार न्यास, कृष्णा नगर, संतोष नगर, आजाद नगर, स्वदेश नगर, वर्मा नगर, न्यू हाउसिंग बोर्ड, शांति विहार, विश्वकर्मा नगर और छोटा थूना सहित एक दर्जन कॉलोनियों के हजारों परिवार पिछले कुछ महीनों से परेशान हैं। रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण शुरू होते ही कॉलोनियों का मुख्य मार्ग बंद हो जाने से मजबूरी में लोगों को अब गलत दिशा से तेज रफ्तार गाड़ियों के बीच निकलना पड़ता है, जिससे हादसों का खतरा बढ़ गया है।
ब्रिज के बाहरी हिस्से पर सर्विस रोड तो बनाई गई है लेकिन अंदरूनी हिस्से की करीब 50 मीटर दूरी अब तक अधूरी है। यह शासकीय अनुपयोगी भूमि पर आसानी से बनाई जा सकती थी, लेकिन विभागीय ढिलाई के कारण अब तक नहीं बन पाई। कॉलोनीवासियों ने इस मार्ग को अपनी जीवनरेखा बताया और कहा कि रोजाना उनकी जान जोखिम में है।
वार्ड पार्षद प्रभा कुशवाहा ने बताया कि कॉलोनीवासियों ने 22 जुलाई को कलेक्टर को जनसुनवाई में आवेदन दिया था। इसके बाद 4 और 14 अगस्त को भी पत्र सौंपे गए। कार्यपालन यंत्री ने ब्रिज निगम भोपाल को निर्देश दिए और निरीक्षण के लिए जेई भेजा, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। लोगों का आरोप है कि जान-बूझकर मामले को टाला जा रहा है।
मेन रोड बंद होने से भारी वाहन कॉलोनी में नहीं आ पा रहे हैं। दुकानों पर ग्राहकों की संख्या कम हो गई है, जिससे व्यापार प्रभावित हो रहा है। मोड़ पर रोजाना दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। महिलाओं और बच्चों के लिए यह रास्ता सबसे ज्यादा असुरक्षित हो गया है। लोग मजबूरी में इसे करतब रोड कहने लगे हैं।
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स्थानीय निवासियों का कहना है कि विवादित भूमि से पहले ग्रीन बेल्ट का क्षेत्र खाली पड़ा है, जहां से वैकल्पिक मार्ग आसानी से बनाया जा सकता है। उनके अनुसार प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण ही समस्या का समाधान नहीं हो रहा।
परेशानियों के चलते अब कॉलोनीवासी सामूहिक आंदोलन की तैयारी में हैं। वरिष्ठ नागरिकों ने विधायक, नगर पालिका अध्यक्ष और प्रभारी मंत्री तक पत्र भेजे हैं। निर्णय लिया गया है कि हर परिवार सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करेगा, ताकि आंदोलन को ताकत मिल सके।
ब्रिज कॉरपोरेशन के सब इंजीनियर केसी वर्मा ने कहा कि कॉलोनीवासियों का आवेदन उनके संज्ञान में आया है लेकिन जिस स्थान पर अप्रोच रोड की मांग है, वहां सड़क बनने से दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ सकता है। मामला वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल टालमटोल कर रहा है और वास्तविकता इसके उलट है।