सीहोर जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) ने लोकतंत्र की जड़ों को झकझोर देने वाली हकीकत सामने ला दी है। डेढ़ महीने तक चले इस अभियान में प्रशासनिक अमले की गहन पड़ताल के बाद यह स्पष्ट हुआ कि जिले की मतदाता सूची में 43,431 ऐसे नाम दर्ज हैं, जिनका अब कोई अस्तित्व नहीं मिल रहा। कोई मृत्यु को प्राप्त हो चुका है, कोई वर्षों पहले पलायन कर गया, तो कुछ मतदाता अन्य जिलों में नाम दर्ज करवा चुके हैं, लेकिन सीहोर से नाम कटवाना भूल गए। यह आंकड़ा केवल संख्या नहीं, बल्कि व्यवस्था में वर्षों से चली आ रही लापरवाही की कहानी कहता है।
11,274 मतदाता रडार पर, पहचान साबित करना अनिवार्य
23 दिसंबर से नोटिस, हर मतदान केंद्र पर सूची होगी सार्वजनिक
निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार 23 दिसंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसी दिन से अनमैप्ड मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाएंगे। हर मतदान केंद्र पर सूची चस्पा की जाएगी, ताकि आम नागरिक अपने नाम स्वयं जांच सकें। दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर भी मिलेगा। एआरओ (एसडीएम या तहसीलदार) द्वारा नोटिस जारी किए जाएंगे और सुनवाई अतिरिक्त एआरओ यानी नायब तहसीलदार के समक्ष होगी। अंतिम मतदाता सूची 21 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी।
पहचान के लिए 13 में से कोई एक दस्तावेज जरूरी
प्रशासनिक अमला महीनों तक उलझा, अब लंबित कामों पर लौटेगा फोकस
4 नवंबर से शुरू हुए इस अभियान में शिक्षा, राजस्व, नगरीय निकाय, पंचायत सहित लगभग हर विभाग का अमला झोंक दिया गया था। शिक्षकों से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक, सभी ने घर-घर जाकर सत्यापन किया। इस कारण शासकीय कामकाज पर भी असर पड़ा। अब एसआईआर का मुख्य काम पूरा होने के बाद विभाग अपने लंबित कार्यों पर ध्यान देंगे। हालांकि बीएलओ बनाए गए शिक्षक अभी भी नोटिस वितरण और अपडेट प्रक्रिया में लगे रहेंगे।
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