सीहोर के लोगों की जिंदगी से जुड़ी सीवन नदी लगातार अपनी जीवंतता खो रही है। सीवन नदी का गहरीकरण और सफाई नहीं होने के कारण यह पूरी तरह उथली हो गई है। हर साल गर्मी आते-आते सीवन नदी सूखने लगती है। लेकिन, अब सीवन नदी के गहरीकरण, सफाई, सौंदर्यीकरण के साथ-साथ सीवन महोत्सव को शुरू करने के लिए शुक्रवार को शहर के लोग आगे आए। इस दौरान सीवन को पुनर्जीवित करने के लिए 2 अप्रैल से सफाई अभियान चलाने का निर्णय लिया गया।
सीवन नदी को नया जीवन देने के लिए आयोजित बैठक में एक दर्जन से अधिक समाजसेवी संगठन, जनप्रतिनिधि और प्रबुद्ध नागरिकों के अलावा क्षेत्रवासियों ने अपने-अपने सुझाव दिए। बैठक में वरिष्ठ समाजसेवी अखिलेश राय, नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर, राजकुमार गुप्ता, गोपाल सोनी, प्रदीप चौहान, भारत सोनी, मधुर विजयवर्गीय, प्रवीण तिवारी, आशीष गेहलोत, विवेक राठौर सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। बैठक में सीवन नदी के तट पर घाटों के सौंदर्यीकरण, गंगा आश्रम, स्वदेश नगर आदि में सीवेज सिस्टम को सुचारू करने, नदी में गंदे पानी के प्रवाह को रोकने और जलकुंभी व कचरे की सफाई के विषय पर गहन चर्चा की गई।
शीघ्र ही समिति का गठन होगा
बैठक के प्रभारी डॉ. गगन नामदेव ने बताया कि पूरा शहर जीवनदायिनी नदी के लिए तन, मन और धन से योगदान देने के लिए तैयार है। इसके लिए शीघ्र ही एक समिति का गठन किया जाएगा। 2 अप्रैल से समिति और क्षेत्रवासी दो चरणों में सफाई अभियान आरंभ करेंगे। उन्होंने बताया कि कई समाजसेवी गहरीकरण कार्य में आर्थिक सहयोग देने के साथ-साथ जागरूकता अभियान भी चलाएंगे। इसके लिए रैलियों और अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिससे लोग नदी में कचरा और निर्माल्य डालने से बचें। बैठक में "संडे का सुकून" समिति, रोटरी क्लब, डॉक्टर एसोसिएशन सहित दो दर्जन से अधिक संगठनों ने अपना योगदान देने की घोषणा की।
अभी तक होती रही अनदेखी
शहर का भूमिगत जल स्तर सीवन नदी और सीटू नाले के कारण बना रहता है, लेकिन लगातार अनदेखी के कारण सीवन नदी पर अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। साथ ही, गहरीकरण न होने से इसमें पर्याप्त पानी संरक्षित नहीं हो पाता, जिससे गर्मी की शुरुआत में ही नदी सूखने लगती है और आसपास के बोरवेल भी सूखने लगते हैं। नदी के गहरीकरण को लेकर स्थानीय लोग कई बार हस्ताक्षर अभियान चला चुके हैं और प्रदर्शन भी कर चुके हैं। यदि क्षेत्र का भूमिगत जल स्तर बनाए रखना है, तो नदी का गहरीकरण किया जाना आवश्यक हो गया है।