सीहोर में दंपती ने अपने अंगदान करने की अनुमति दी है।
- फोटो : अमर उजाला
सीहोर में चाणक्यपुरी निवासी अनुसूचित जाति वर्ग के दंपती जानी सोनकर और उनकी पत्नी ललिता सोनकर ने मानवता का ऐसा संकल्प लिया है, जिसे सुनकर हर कोई प्रभावित हो रहा है। उन्होंने निर्णय लिया है कि अपने जीवन के अंतिम समय में वे सभी उपयोगी अंग जरूरतमंदों को दान करेंगे। इसमें हृदय, गुर्दे, यकृत, फेफड़े, अग्न्याशय, आंत और आंखें शामिल हैं। जिले के चाणक्यपुरी निवासी जानी सोनकर और उनकी पत्नी ललिता सोनकर ने मानवता की ऐसी मिसाल पेश की है, जो शायद ही कहीं देखने को मिले। दोनों ने जरूरतमंद लोगों की जिंदगी बचाने के लिए अपने यकृत, गुर्दे, हृदय, फेफड़े, आंत, आंखें और अग्न्याशय सहित सभी उपयोगी अंग दान करने का संकल्प लिया है।
ये भी पढ़ें-
बदले की जिद में अपनी ही बेटी को बनाया मोहरा, पैर में मारी गोली, सात साल बाद खुला राज; पहुंचा जेल
दंपती ने बताया कि यह निर्णय उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से मिली प्रेरणा के बाद लिया। मंत्रालय ने उन्हें अंगदान हेतु गौरवपूर्ण प्रतिज्ञा प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया है। जानी सोनकर ने बताया कि उनके कई परिजन अंग खराब होने के कारण समय से पहले ही दुनिया छोड़ चुके हैं। इसी अनुभव ने उन्हें यह कदम उठाने की प्रेरणा दी। उनका कहना है कि मरने के बाद शरीर जलकर मिट्टी में मिल जाता है, लेकिन अंगदान करने से हम किसी और की जिंदगी में जीवित रहेंगे।
ये भी पढ़ें-
प्रियंका और मोइनुद्दीन ने कई व्यापारियों को फंसाया, बड़ा लालच दिया फिर शिकार बनाया
मृत्यु उपरांत अंगदान की प्रक्रिया
दंपती ने चिकित्सा विशेषज्ञों के बोर्ड को लिखित अनुमति दी है कि मृत घोषित किए जाने के बाद उनके शरीर से चिकित्सीय उपयोग के लिए अंग और ऊतक निकाले जा सकें। परिजन भी इस निर्णय से सहमत हैं और मृत्यु के बाद उनका शव चिकित्सा टीम को सौंपेंगे। दोनों पति-पत्नी ने नागरिकों से अपील की है कि वे भी मानवीय आधार पर अंगदान का संकल्प लें। उनका मानना है कि जीवन के अंतिम क्षणों में यह निर्णय न केवल दूसरों को जीवन देता है, बल्कि व्यक्ति को अमरता भी देता है।