जाकिर खान ने नहीं छोड़ी जिद
स्कूल प्रबंधन की ओर से कहा गया कि अगर, नमाज पढ़ी है तो मस्जिद में जा सकते हैं। लेकिन, अतिथि शिक्षक जाकिर खान को यह बात पसंद नहीं आई। वह अपनी बात पर अड़े रहे। उनका कहना था- मैं स्कूल में ही नमाज अदा करूंगा। यह बात ग्रामीणों तक भी पहुंची, इसके बाद ग्रामीणों, सरपंच, शिक्षक जाकिर खान की पत्नी और प्राचार्य समेत अन्य शिक्षकों व विभागीय अधिकारियों ने भी उन्हें समझाने का प्रयास किया। सभी की ओर से कहा गया कि नमाज को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग में कोई नियम नहीं हैं। स्कूल में में ऐसा नहीं किया जा सकता, बच्चों को पढ़ाकर इबादत की जा सकती है। लेकिन, अपनी जिद पर अड़े शिक्षक पर इसका भी कोई असर नहीं हुआ। सात फरवरी को शिक्षक जाकिर खान ने स्कूल प्राचार्य के नाम एक आवेदन पत्र देकर शाला से कार्यमुक्त करने की मांग कर दी।
एसएमडीसी की बैठक में शिक्षक को किया कार्यमुक्त
शिक्षक जाकिर खान द्वारा नौकरी से कार्यमुक्त करने को लेकर दिए गए आवेदन के बाद स्कूल की एसएमडीसी की एक बैठक हुई। जिसमें प्रबंधन समिति के अध्यक्ष सुखराम मेहरा, प्राचार्य रविंद्र नागरे, सरपंच, पंच समेत प्रबंधन समिति के सदस्यों की मौजूदगी में शिक्षक जाकिर खान को कार्यमुक्त करने का आदेश जारी कर दिया गया।
कई बार समझाया पर नहीं माने
स्कूल प्राचार्य रविंद्र नागरे ने बताया कि अतिथि शिक्षक जाकिर खान स्कूल समय में नमाज पढ़ते थे, जिसे लेकर उन्हें समझाइश दी गई थी। उनसे कहा गया था- वह मस्जिद में जाकर नमाज कर सकते हैं। लेकिन, वह नहीं माने। उन्होंने स्कूल से कार्यमुक्त होने का आवेदन भी दिया था। जिसके आधार पर एसएमडीसी ने प्रस्ताव पास कर उन्हें अतिथि शिक्षक से पद से हटा दिया गया है।