सीहोर जिले के ग्राम नोनीखेड़ी-खामलिया मार्ग पर रविवार रात उस समय हड़कंप मच गया, जब एक अधेड़ व्यक्ति को बच्चा चोर समझ लिया गया। इन दिनों गांव-गांव में बच्चा चोर गिरोह की अफवाहें तेज़ी से फैल रही हैं। इसी डर और दहशत के माहौल में ग्रामीणों ने संदिग्ध हालत में घूम रहे व्यक्ति को पकड़ लिया। कुछ ही देर में मौके पर भीड़ जमा हो गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
ग्रामीणों का कहना था कि व्यक्ति बार-बार इधर-उधर देख रहा था और कुछ स्पष्ट नहीं बता पा रहा था। शक की सुई घूमी और देखते ही देखते भीड़ ने उसे घेर लिया। हालांकि किसी भी प्रकार की हिंसा से बचने के लिए सरपंच और जागरूक ग्रामीणों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी।
थाना कोतवाली टीआई रविन्द्र यादव ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और व्यक्ति को सुरक्षित थाने ले आई। प्रारंभिक पूछताछ में स्पष्ट हुआ कि ग्रामीणों को बच्चा चोर होने का शक था, लेकिन ठोस आधार नहीं था। पुलिस ने भीड़ को समझाइश दी कि अफवाहों के आधार पर किसी को अपराधी करार देना कानूनन गलत है। समय रहते पुलिस के हस्तक्षेप से संभावित भीड़ हिंसा टल गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।
जलगांव से भटककर पहुंचा गांव
जांच में सामने आया कि पकड़ा गया व्यक्ति गुलाब पिता देवदास है, जो महाराष्ट्र के जलगांव का निवासी है। उसके पास से जलगांव से भोपाल तक का चार लोगों का टिकट मिला है। इससे संकेत मिलता है कि वह किसी देवस्थान पर दर्शन के लिए आया था। पुलिस के अनुसार, व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोर प्रतीत होता है और स्पष्ट जानकारी देने में असमर्थ है। संभावना जताई जा रही है कि वह रास्ता भटककर नोनीखेड़ी गांव पहुंच गया।
बैग से मिले सामान ने बढ़ाया शक
ग्रामीणों के मुताबिक व्यक्ति के बैग से टॉफियां, नींबू, महिला के वस्त्र और कुछ गोलियां मिलीं। यही सामान ग्रामीणों के शक का कारण बना। हालांकि पुलिस का कहना है कि केवल सामान के आधार पर किसी को अपराधी नहीं ठहराया जा सकता। पुलिस ने बरामद सामग्री को जब्त कर जांच शुरू कर दी है। यह भी देखा जा रहा है कि गोलियां किस प्रकार की हैं और उनका उपयोग क्या है। फिलहाल कोई आपराधिक प्रमाण सामने नहीं आया है।
आधार कार्ड नहीं, जवाब देने में असमर्थ
सबसे बड़ी दिक्कत यह रही कि व्यक्ति के पास कोई पहचान पत्र या आधार कार्ड नहीं मिला। वह अपने बारे में भी स्पष्ट जानकारी देने में असमर्थ था। इसी कारण ग्रामीणों का शक और गहरा गया। पुलिस ने बताया कि ऐसे मामलों में धैर्य और संवेदनशीलता जरूरी है। मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति अक्सर घबराहट में सही जवाब नहीं दे पाते, जिससे गलतफहमी पैदा हो जाती है।
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अफवाहों से सावधान रहने की अपील
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि बच्चा चोर गिरोह जैसी अफवाहों पर आंख मूंदकर विश्वास न करें। सोशल मीडिया और व्हाट्सएप संदेशों के जरिए फैल रही अपुष्ट खबरें कई बार निर्दोष लोगों की जान पर बन आती हैं। सीहोर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल जिले में किसी संगठित बच्चा चोर गिरोह की पुष्टि नहीं हुई है। जांच पूरी होने तक व्यक्ति को संरक्षण में रखा गया है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।