सीहोर में जघन्य हत्याकांड के आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। छह हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। बता दें कि दस हजार रुपये की उधारी के चक्कर में बेरहमी से हत्या की गई थी। बाद में पहचान छिपाने के लिए चेहरे पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई थी।
जिला अभियोजन अधिकारी देवेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि मामला दो साल पुराना है। तीन अगस्त 2020 को बबीता ने थाना जावर में सूचना दी कि मेरे पति जितेन्द्र जगन्नाथ चावड़ा (30) 28 जुलाई 2020 को घर से सुबह सीहोर जाने का कहकर निकले थे। जो लौटकर नहीं आए, न ही उनसे संपर्क हो पा रहा है। थाने में गुमशुदगी दर्ज कर ली गई थी। उधर तीन दिन बाद ही एक अगस्त को गुडभेला, जताखेडा कांकड थाना मंडी के पास एक अज्ञात व्यक्ति के शव संबंध में सूचना प्राप्त हुई। शव काफी क्षत-विक्षत हालत में था। शव की पहचान जितेंद्र के रूप में हुई।
पुलिस को जांच में पता चला कि दुर्गेश मालवीय घटना वाले दिन जितेंद्र के संपर्क में था। दुर्गेश मालवीय से पूछताछ में उसने हत्या की बात कबूल कर ली थी। उसने बताया था कि दस हजार रुपये का विवाद था। इसलिए पहले उसने जितेन्द्र को शराब पिलाई फिर गला दबाकर मार दिया। बाद में शव की पहचान छुपाने के लिए पेट्रोल डालकर चेहरे व शरीर पर आग लगा दी। पुलिस ने मामला कोर्ट में पेश किया था।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरएन चन्द्र ने सुनवाई के बाद दुर्गेश पिता रमेश मालवीय (31) निवासी इन्दौर नाका दशहरा वाला बाग सीहोर को दोषसिद्ध पाया। जिला कोर्ट ने आरोपी को धारा 302 भादवि में आजीवन कारावास एवं 5000 रुपये अर्थदंड एवं धारा 201 भादवि में तीन साल सश्रम कारावास एवं 1000 रुपये के अर्थदण्ड से दंडित किया।