नियम विरुद्ध चल रहे ऑटो रिक्शा के खिलाफ परिवहन विभाग के अभियान के कारण जिले की सड़कों से करीब तीन सौ ऑटो रिक्शा गायब हो गए हैं। ये वे ऑटो हैं, जिनके पास परमिट सहित अन्य दस्तावेजों की कमी है। कार्रवाई के डर से इनके चालक इन्हें अभी नहीं चला रहे हैं। इसके कारण ऑटो रिक्शा से सफर करने वाले यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। परिजनों को अपने साधन से स्कूलों में बच्चों को छोडऩे जाना पड़ रहा है।
जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश पर प्रदेश में नियम विरुद्ध चल रहे ऑटो रिक्शा के खिलाफ परिवहन विभाग द्वारा अभियान चलाया जा रहा है। परिवहन विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक जिले में पिछले पांच सालों में तीन सौ ऑटो का पंजीयन हुआ है। इसके अलावा करीब दो सौ ऑटो भोपाल और आसपास के क्षेत्रों से सीहोर में आ-जा रहे हैं, इनमें से करीब 80 प्रतिशत के पास परमिट और अन्य कागज पूरे नहीं हैं। पिछले कुछ दिनों से चल रही सख्त कार्रवाई के कारण ये सभी ऑटो चलना बंद हो गए हैं।
रोज कर रहा सड़कों पर आरटीओ अमला जांच
जिले में अब तक सौ से अधिक वाहनों पर कार्रवाई हुई है। परिवहन विभाग ने करीब 70 ऑटो पकड़े हैं। वहीं पुलिस ने भी ऑटो पर कार्रवाई की है। पिछले एक सप्ताह से ऑटो रिक्शा कोतवाली व मंडी थाना परिसर में खड़े हैं। इनके संचालक न्यायालय में डायरी पेश होने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं आटो वाले भी नाराज हैं। उनका कहना है कि न्यायालय का हम सब सम्मान करते हैं और यदि हमारे ऑटो और दस्तावेजों में कोई कमी है तो उसको पूरा किया जाएगा। साथ ही जो भी चालान देय होगा हम देंगे, लेकिन आरटीओ ने पहले तो स्पॉट पर चालानी कार्रवाई की फिर ऑटो को न्यायालय में पेश किया। जहां फिर से उन पर चालानी कार्रवाई की गई।
80 ऑटो चालकों ने बनवाए परमिट
परिवहन विभाग के अनुसार कार्रवाई के चलते पिछले एक सप्ताह में 80 वाहनों के परमिट और फिटनेस ऑटो रिक्शा चालकों द्वारा बनवाए जा चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार सख्ती के डर से कई बगैर कागजात वाले ऑटो चालकों ने ऑटो चलाना बंद कर दिया है। उल्लेखनीय है कि कई ऑटो चालक न तो वर्दी पहनते हैं और न ही नियमों का पालन करते हैं तथा अंधाधुंध गति से गाड़ी चलाते हैं।
इस संबंध में जिला परिवहन अधिकारी रितेश तिवारी का कहना है कि ऑटो चालकों के पास वैध दस्तावेज नहीं मिले थे, इसलिए कार्रवाई की गई है।