मध्य प्रदेश के सीहोर में नाबालिग से दुष्कर्म करने वाले आरोपी को कोर्ट ने दोषी करार दिया है। 20 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। आरोपी नाबालिग को बहला-फुसलाकर शादी का झांसा दिया और फिर दुष्कर्म किया था। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अशोक भारद्वाज ने फैसले के साथ पीड़ित नाबालिग को पुनर्वास के लिए प्रतिकर के रूप में 50 हजार रुपये देने के आदेश भी दिए हैं।
जानकारी के अनुसार मामला 4 जनवरी 2020 का है। मीडिया सेल प्रभारी केदार सिंह कौरव ने बताया कि घटना वाले दिन सुबह 10 बजे नाबालिग घर से फोटोकॉपी कराने का कहकर इछावर गई थी, जो लौटकर नहीं आई। परिजनो ने सभी जगह पूछताछ की। नाबालिग के पिता ने शक जाहिर किया कि नाबालिग को गांव का बलराम बहला-फुसलाकर ले गया होगा। पिता ने अगले दिन थाना इछावर को सूचना दी।
पुलिस ने 12 जनवरी 2020 को नाबालिग को तलाश लिया। नाबालिग ने पुलिस को बताया कि जब वह इछावर बस स्टैंड पर फोटोकॉपी कराने के लिए गई थी तभी उसे आरोपी मिला। वह उसे बहला-फुसलाकर पहले उज्जैन ले गया फिर शादी का झांसा देकर जेलटोप टाइल कंपनी मोरवी गुजरात ले गया और वहां पर आरोपी ने एक किराये का कमरा लिया और नाबालिग के साथ कई बार दुष्कर्म किया। विरोध करने पर धमकाया। कोर्ट में पीड़िता एवं उसके परिजन ने घटना का समर्थन किया। घटना के समय नाबालिग की उम्र 16 साल से कम थी। कोर्ट ने अभियुक्त बलराम पिता हरिकिशन सूर्यवंशी, उम्र 24 वर्ष निवासी थाना इछावर को 20 वर्ष का सश्रम कारावास की सजा सुनाई। दो हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।